हल्द्वानी: खड़गे की रैली के बाद मैदान के 'शुद्धीकरण' पर बवाल, कांग्रेस ने कहा- दलित विरोधी, श्री राम सेना की सफाई

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हल्द्वानी का रामलीला मैदान राजनीतिक अखाड़ा बन गया है. रैली खत्म होने के बाद 'श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास' द्वारा मैदान में किए गए 'शुद्धीकरण' और यज्ञ को लेकर सियासत गरमा गई है.

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हल्द्वानी रामलीला मैदान शुद्धिकरण विवाद (Photo-ITG) हल्द्वानी रामलीला मैदान शुद्धिकरण विवाद (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 14 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद रामलीला मैदान के 'शुद्धीकरण' को लेकर सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस इसे दलित विरोधी मानसिकता से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साध रही है. वहीं, 'शुद्धीकरण' कराने वाले श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे राजनीतिक लाभ और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास बताया है.

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संगठन के अध्यक्ष गिरीश पांडे ने स्पष्ट किया कि 'शुद्धीकरण' का उद्देश्य किसी जाति या समुदाय को निशाना बनाना नहीं था. उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक आयोजनों के लिए निर्धारित है, लेकिन वहां राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम के दौरान धार्मिक भावनाओं से जुड़े नारे भी लगाए गए और रैली समाप्त होने के बाद मैदान में गंदगी समेत पेशाब से भरी बोतलें भी पड़ी मिलीं.

गिरीश पांडे ने बताया कि संगठन ने पहले मैदान की सफाई कराई और उसके बाद वहां यज्ञ का आयोजन किया, उन्होंने कहा कि इस यज्ञ में अनुसूचित जाति समाज के लोग भी सहभागी रहे. ऐसे में पूरे आयोजन को दलित विरोधी बताना तथ्यों से परे है.

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उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा इस धार्मिक अनुष्ठान को दलित विरोध से जोड़ना केवल राजनीतिक मुद्दा बनाने का प्रयास है. संगठन का कहना है कि यज्ञ का उद्देश्य मैदान की स्वच्छता और धार्मिक पवित्रता बनाए रखना था, न कि किसी जाति या समुदाय का अपमान करना. इस यज्ञ में अनुसूचित जाति समाज से जुड़े अंकित पाल, नंदकिशोर आर्य, विनोद आर्य और मोहित आर्य समेत कई लोग उपस्थित रहे. संगठन ने कहा कि इन तथ्यों के बावजूद आयोजन को दलित विरोधी बताना समाज में अनावश्यक विवाद और भावनाएं भड़काने का प्रयास है.

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