उत्तराखंड में केदारनाथ यात्रा के मुख्य पड़ाव गौरीकुंड में हुई बड़ी त्रासदी के बाद प्रशासन ने बुलडोजर कार्रवाई की है. गौरीकुंड में सड़क किनारे अतिक्रमण को हटाने का काम शुरू किया गया है. कई दुकानों को ध्वस्त किया गया है. साथ ही कई दुकानों से सामान खाली करवाया गया है. बता दें कि गौरीकुंड त्रासदी में 23 लोगों की मौत हुई थी.
दरअसल, सोनप्रयाग-गौरीकुंड सड़क मार्ग साल 2013 की आपदा के बाद से बेहद संकरा हो गया है. मुश्किल से यहां एक बार में एक गाड़ी का आना-जाना हो पाता है. इसपर से सड़क किनारे बेहद खतरनाक जगहों पर ढाबें बनाए गए हैं. इस कारण जाम की स्थिति बनी रहती है. कुछ दुकानें गौरीकुंड में आपदा की भेंट चढ़ गई. वे दुकानें बेहद ही डेंजर जोन पर बनाई गई थी.
अतिक्रमण कर बनाई गई थीं ज्यादातर दुकानें
पांच से अधिक उन दुकानों को ध्वस्त किया गया, जो मंदाकिनी नदी के ठीक ऊपर बेहद डेंजर जोन पर अतिक्रमण करके बनाई गई थी. आस पास के क्षेत्रों में जो अन्य दुकानें बनाई गई हैं, उनके सामान खाली कराने के निर्देश दिए गए हैं और दुकानें खाली होते ही उन्हें भी ध्वस्त किया जाएगा. करीब 20 से अधिक दुकानें ऐसे ही, जो अतिक्रमण करके बनाई गई हैं और अब उनको ध्वस्त किया जाएगा.
दुकानदारों पर रोजी-रोटी का संकट
वहीं, जिन लोगों के अस्थाई ढाबों पर बुलडोजर चला है उन व्यापारियों का कहना है कि उन्हें बिना बताते हुए ही कार्रवाई की गई है. उन्हें सामान हटाने का भी मौका नहीं दिया गया और उनका लाखों रुपये का सामान भी फेंक दिया गया है. उनके सामने अब रोजी-रोटी का भी संकट गहरा गया है. उनके दुकान के अंदर लाखों रुपए का सामान भरा था. वे दुकान खाली करके सामान लेकर कहां जायेंगे.
अतिक्रमण की गई दुकानें को हटाया जाएगा
उप जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि जो दुकानें ध्वस्त की गई हैं, उनको सामान हटाने का समय दिया गया था. यात्रा शुरू होने से पहले ही अतिक्रमण हटाने के लिया कहा गया था. मगर, ये लोग नहीं माने. सड़क किनारे जो भी डेंजर जोनों पर अतिक्रमण करके दुकानें खोली गई हैं, उन सबको हटाया जाएगा.
प्रवीण सेमवाल