नड्डा के साथ BRD अस्पताल पहुंचे योगी ने खेला संवेदना कार्ड, दिया कार्रवाई का भरोसा

मुख्यमंत्री ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत की खबरों को इंकार करते हुए कहा कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति प्रकरण की जांच करेगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.

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मीडिया को संबोधित करते योगी आदित्यनाथ और जेपी नड्डा मीडिया को संबोधित करते योगी आदित्यनाथ और जेपी नड्डा

लव रघुवंशी / मौसमी सिंह / शिवेंद्र श्रीवास्तव

  • गोरखपुर,
  • 13 अगस्त 2017,
  • अपडेटेड 5:42 PM IST

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है. आज दिमागी बुखार से एक और 4 साल के बच्चे की मौत हो गई. पिछले 3 दिन में ही मौत का आंकड़ा 68 पहुंच गया. इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर के इस अस्पताल में पहुंचे. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी सीएम योगी के साथ थे. इस दौरान मीडिया द्वारा सवाल करने पर सीएम ने पत्रकारों से कहा कि कुछ तो शर्म करो. योगी की विजिट के चलते पूरे अस्पताल को साफ-सुथरा किया गया. ऑक्सीजन की सप्लाई को दुरूस्त करने के लिये लिक्विड ऑक्सीजन के दो टैंकर और ऑक्सीजन के सौ से ज्यादा सिलेंडर मंगा लिए गए हैं.

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वहीं CM योगी के BRD अस्पताल दौरे से ठीक बाद अस्पताल के वाइस प्रिंसिपल और सुपरिंटेंडेंट डॉक्टर कफील खान को ड्यटी से हटा दिया गया है. इससे पहले मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल राजीव मिश्रा को सस्पेंड कर दिया था. 

बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पीएम भी इस घटना से चिंतित हैं और उन्होंने हरसंभव मदद का भरोसा दिया है. पीएम ने स्वास्थ्य मंत्री को गोरखपुर भेजा है. पूरे मामले की जांच आवश्यक है. योगी ने कहा कि इंसेफेलाइटिस के खिलाफ लड़ाई और तेज होगी. मैं मुख्यमंत्री बनने के बाद अब तक 4 बार BRD अस्पताल आ चुका हूं. 9 जुलाई को हमने वेतन ना मिलने की समस्या को सुलझाया था. 9 अगस्त को भी मैं यहां आया था, जिसमें 5 प्रमुख सचिवों को यहां बुलाया गया था. मैं चाहता हूं कि हर पत्रकार वार्ड के अंदर जाकर खुद देखे कि हालात क्या है, सच्चाई क्या है. मैं 1996-97 से इस लड़ाई को लड़ रहा हूं. उन बच्चों के लिए मुझसे ज्यादा संवेदनशील कोई नहीं हो सकता. मैं इंसेफेलाइटिस के खिलाफ सड़क से संसद तक लड़ा. सीएम योगी इस दौरान भावुक भी हुए.

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योगी ने कहा कि चीफ सेकेट्री की अध्यक्षता में जांच हो रही है. दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई होगी. कमेटी मौतों की वजह सामने लाएगी. सिर्फ गोरखपुर ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में मौतों की जवाबदेही तय होगी. बाहर बैठकर फेक रिपोर्टिंग नहीं, बल्कि जनता के सामने सच्चाई सामने आनी चाहिए. हम चाहते हैं कि गोरखपुर में फुल फ्लैज्ड वायरस रिसर्च सेंटर होना चाहिए. इसके लिए हमने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया है. उनकी तरफ से एक पहल भी हुई है.

इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना था कि बच्चे ऑक्सीजन की वजह से नहीं बल्कि हैं. मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत की खबरों को इंकार करते हुए कहा कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति प्रकरण की जांच करेगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता को भुगतान में विलंब के लिए कॉलेज के प्रिसिंपल को दोषी ठहराते हुए कहा कि 9 अगस्त को गोरखपुर प्रवास के दौरान उन्होंने , डेंगू, चिकुनगुनिया, स्वाइन फ्लू और कालाजार जैसे मुद्दों पर अधिकारियों से बातचीत की थी और उनसे पूछा था कि उनकी आवश्यकता क्या है और क्या उन्हें किसी तरह की कोई समस्या है, लेकिन ऑक्सीजन आपूर्ति से जुड़ा मुद्दा उनके संज्ञान में नहीं लाया गया. उन्होंने कहा, बैठक में मेडिकल कॉलेज के प्रिसिंपल भी मौजूद थे. मैंने पूछा कि कोई मुद्दा हो या समस्या हो तो बताएं, लेकिन वहां ऑक्सीजन को लेकर कोई जिक्र नहीं किया गया. हम लोगों की जानकारी में नहीं लाया गया.

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अगस्त में होती ही है बच्चों की मौत

यूपी के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ ने कहा कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं. इसमें नई बात क्या है. मौत के आंकड़ों में घुमाते-घुमाते मंत्री बता गए कि कौन-कब किस महीने में मरता है. चलिए आकड़ों से ही खेल लीजिए लेकिन ये तो बता दीजिए कि जब पता ही था कि अगस्त में बच्चे मरेंगे तो उन्हें मरने से बचाने के लिए आपने क्या किया? आप राज्य के स्वास्थ्य मंत्री हैं. राज्य की जनता के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी आप पर है. बीमारी का इलाज ना सही सांसों के सिलेंडर का तो इंतजाम कर देते.

 

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