तेलंगाना-महाराष्ट्र सीमा से लगे कई गांवों में वोटर लिस्ट के एसआईआर अभियान का विरोध शुरू हो गया है. कई साल से लंबित जमीन विवाद से नाराज ग्रामीणों ने मतदाता गणना के फॉर्म लेने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि जब तक दोनों राज्यों के अधिकारी संयुक्त रूप से गांवों में पहुंचकर उनकी जमीन से जुड़ी समस्या का समाधान नहीं करते, तब तक वे SIR प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे.
गांव वालों ने कहा कि वे SIR प्रक्रिया में तब तक सहयोग नहीं करेंगे, जब तक कोमाराम भीम आसिफाबाद (तेलंगाना) और चंद्रपुर (महाराष्ट्र) के कलेक्टर और तहसीलदार संयुक्त रूप से गांवों का दौरा न करें और उनकी शिकायतों का समाधान न करें.
यह मामला केरामेरी मंडल में सामने आया, जहां अंतर-राज्यीय सीमा पर स्थित गांवों में गिनती अभियान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. जहां अंथापुर और भोलापातर ग्राम पंचायतों के कुछ निवासियों ने फॉर्म स्वीकार कर लिए, वहीं परंधोली और मुकाडांगुडा ग्राम पंचायतों के तहत आने वाले परंधोली, कोटा, लेंडीगुडा, शंकरलोद्दी, परंधोली थांडा, मुकाडांगुडा और महाराजगुडा के मतदाताओं ने इसमें भाग लेने से इनकार कर दिया.
अपने फैसले पर अड़े गांव के लोग
बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) और सुपरवाइजरों की बार-बार समझाने की कोशिशों के बावजूद, गांव वाले अपने फैसले पर अड़े रहे. क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि अधिकारी जमीन से जुड़े उन विवादों को सुलझाने में नाकाम रहे हैं, जिनसे सीमा के पास बसे करीब 15 गांव प्रभावित हैं. इन गांवों में करीब 75% आबादी अनुसूचित जाति (SC) समुदाय की है.
गांव वालों का कहना है कि 2014 तक वे बैंकों से खेती के लिए लोन लेकर इन जमीनों पर खेती करते रहे थे. हालांकि, उनका दावा है कि उसके बाद से किसी भी सरकार ने उनकी जमीनों के लिए 'पाहनी' यानी जमीन के मालिकाना हक का रिकॉर्ड जारी नहीं किए हैं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी अब इन जमीनों को 'रिजर्व फॉरेस्ट' यानी संरक्षित वन का हिस्सा मान रहे हैं और खेती करने से रोक रहे हैं, उनका कहना है कि इस इलाके में पेड़-पौधे लगाए जाएंगे.
गांव वालों का जोर है कि SIR की चल रही गिनती की प्रक्रिया में शामिल होने से पहले उनकी जमीन से जुड़े मुद्दों का समाधान किया जाना चाहिए.
अब्दुल बशीर