नौसेना वॉर रूम लीक कांड मामले में सेवानिवृत कैप्टन को 7 साल की जेल

दिल्ली की एक अदालत ने 2006 के नौसेना वॉर रूम लीक कांड से जुड़े एक मामले में सेवानिवृत कैप्टन सलाम सिंह राठौड़ को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने कहा कि राठौड़ किसी नरमी के हकदार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध किया है.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

राम कृष्ण / पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 12:24 AM IST

दिल्ली की एक अदालत ने 2006 के नौसेना वॉर रूम लीक कांड से जुड़े एक मामले में सेवानिवृत कैप्टन सलाम सिंह राठौड़ को सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने कहा कि राठौड़ किसी नरमी के हकदार नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध किया है.

सीबीआई की विशेष अदालत के जज एसके अग्रवाल ने सरकारी गोपनीयता कानून (ओएसए) के तहत जासूसी के अपराध के दोषी राठौड़ को सात साल जेल की सजा सुनाते हुए कहा कि उनके पास से बरामद किए गए दस्तावेज रक्षा मंत्रालय के थे और प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शत्रु के लिए उपयोगी थे.

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इस मामले के एक अन्य आरोपी सेवानिवृत कमांडर जरनैल सिंह कालरा को अदालत ने बरी कर दिया. राठौड़ को सजा सुनाते हुए अदालत ने सरकारी वकील की इस दलील पर विचार किया कि राठौड़ के पास से कई गोपनीय दस्तावेज बरामद किए गए और वह यह नहीं बता सके कि उनके पास वे दस्तावेज कहां से आए.

जज ने कहा कि इस मामले में दोषी की ओर से किया गया अपराध न केवल समाज के खिलाफ था, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ किया गया अपराध था. उन्होंने कहा कि दोषी सजा में नरमी का हकदार नहीं है, क्योंकि उसने अपने से खिलवाड़ किया है. रक्षाकर्मी होने के नाते उसकी पहली जिम्मेदारी थी कि वह भारत की एकता, अखंडता एवं सुरक्षा के लिए अपना जीवन भी दांव पर लगा दे, लेकिन उसने ठीक उल्टा किया.

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जज ने यह भी कहा कि दोषी को सजा देना दूसरों के लिए एक सीख है, ताकि कोई भी ऐसे अपराध को अंजाम नहीं दे. उन्होंने कहा कि यह अदालत महसूस करती है कि इस मामले में दोषी को दी जाने वाली सजा ऐसी होनी चाहिए कि यह दूसरों के लिए सीख का काम करे, ताकि कोई भी ऐसे अपराध को अंजाम नहीं दे, जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा पैदा होता हो.

मामले में दायर अपने अलग आरोप-पत्र में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि उसे राठौड़ के पास से विभिन्न मुद्दों से जुड़े 17 आधिकारिक दस्तावेज मिले थे. इनमें से नौ दस्तावेज गुप्त थे, जबकि चार प्रतिबंधित और एक गोपनीय था. राठौड़ के लिए अधिकतम 14 साल की सजा मांग रही सीबीआई ने दलील दी थी कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध किया और वह नरमी के हकदार नहीं हैं.

बहरहाल, दोषी ने अदालत से नरमी की गुहार लगाते हुए कहा कि वह पहले ही तीन साल जेल में बिता चुके हैं और 13 साल से मुकदमे का सामना कर रहे हैं. दोषी के वकील ने कहा कि राठौड़ 63 साल के वरिष्ठ नागरिक हैं, जिन्होंने रक्षा में 28 साल की सेवा दी है. साल 2006 के नौसेना वॉर रूम लीक कांड में नौसैनिक वॉर रूम और वायुसेना मुख्यालय से संवेदनशील रक्षा सूचनाओं से लैस 7,000 से ज्यादा पन्ने लीक हो गए थे. यह ऐसे दस्तावेज थे, जिनका सीधा जुड़ाव राष्ट्रीय सुरक्षा से था.

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इस कांड के मामले में के पूर्व लेफ्टिनेंट कुलभूषण पराशर, पूर्व कमांडर विजेंदर राणा, बर्खास्त किए जा चुके नौसेना के कमांडर वीके झा, भारतीय वायुसेना के पूर्व विंग कमांडर संभा जीएल सुर्वे और दिल्ली में रहने वाले कारोबारी और हथियार डीलर अभिषेक वर्मा पर आईपीसी व सरकारी गोपनीयता कानून के तहत मुकदमा चल रहा है. सभी आरोपी अभी जमानत पर हैं.

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