LIVE: कावेरी जल विवाद पर तमिलनाडु को झटका, SC ने कहा- नदी किसी एक राज्य की नहीं

दक्षिण भारतीय राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के बीच दशकों पुराने कावेरी जल विवाद पर उच्चतम न्यायालय आज फैसला सुना सकता है.

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कावेरी रिवर बेसिन कावेरी रिवर बेसिन

संजय शर्मा / अक्षया नाथ

  • बेंगलुरु\नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2018,
  • अपडेटेड 12:25 PM IST

दक्षिण भारतीय राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल के बीच दशकों पुराने कावेरी जल विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने कावेरी नदी के पानी का बंटवारा करते हुए कर्नाटक के हिस्से का पानी बढ़ा दिया है. कोर्ट ने कहा कि तमिलनाडु को 192 की बजाए 177.25 TMC पानी दिया जाए, वहीं बेंगलुरु को 4.75 TMC पानी दिया जाएगा. कोर्ट ने कर्नाटक के हिस्से के पानी में 14.75 TMC पानी बढ़ाया है. अब कर्नाटक को कुल 285 TMC पानी मिलेगा.

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कोर्ट ने तमिलनाडु को मिलने वाले पानी की मात्रा को घटा दिया है. इस फैसले से कर्नाटक को फायदा पहुंचा है.कोर्ट ने कहा कि नदी पर किसी राज्य का दावा नहीं है. अब इस फैसले को लागू कराना केंद्र सरकार का काम है. कोर्ट ने कहा कि पानी राष्ट्रीय संपत्ति है. कोर्ट के इस फैसले पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने खुशी जताई है. कोर्ट ने कहा कि अगले 15 साल के लिए ये फैसला प्रभावी रहेगा.

तमिलनाडु ने कावेरी बेसिन से तमिलनाडु को 10 टीएमसी ग्राउंड वाटर अतिरिक्त इस्तेमाल की इजाजत भी दी. इससे पहले कर्नाटक ने तमिलनाडु को ये कहते हुए कावेरी का पानी देने से इंकार कर दिया था कि उनके अपने किसानों के लिए ही पानी पर्याप्त नहीं है.

तमिलनाडु को इस फैसले से झटका लगा है. राज्य सरकार ने कहा है कि इस फैसले के अध्ययन के बाद वे आगे की कार्रवाई तय करेंगे. 137 साल पुराने कावेरी जल विवाद को लेकर कर्नाटक-तमिलनाडु और केरल आमने-सामने हैं. वहीं एआईएडीएमके ने इस फैसले पर नाखुशी जताई है. पार्टी इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल कर सकती है.

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इस फैसले के मद्देनजर कर्नाटक तमिलनाडु बॉर्डर पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. फैसले के बाद कर्नाटक से तमिलनाडु आने वाली बसों को बॉर्डर के बाहर ही रोक दिया गया.

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़़ की पीठ ने पिछले वर्ष 20 सितंबर को कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल की तरफ से दायर अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. तीनों राज्यों ने कावेरी जल विवाद अधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) की तरफ से 2007 में जल बंटवारे पर दिए गए फैसले को चुनौती दी थी.

दशकों पुराने कावेरी जल विवाद पर 2007 में सीडब्ल्यूडीटी ने कावेरी बेसिन में जल की उपलब्धता को देखते हुए एकमत से निर्णय दिया था. फैसले में तमिलनाडु को 419 टीएमसीफुट (हजार मिलियन क्यूबिक फुट) पानी आवंटित किया गया. कर्नाटक को 270 टीएमसीफुट, केरल को 30 टीएमसीफुट और पुडुचेरी को सात टीएमसीफुट पानी आवंटित किया गया था.

शीर्ष अदालत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इसके फैसले के बाद ही कोई पक्ष कावेरी से जुड़े मामले पर गौर कर सकता है.

कावेरी विवाद तीन राज्यों के बीच तनाव का कारण लंबे समय से रहा है. इसके मद्देनजर फैसले से पहले तीनों राज्यों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. बंगलुरु के पुलिस आयुक्त टी. सुनील कुमार ने बताया कि 15 हजार पुलिसकर्मियों को ड्यूटी पर तैनात किया जाएगा. इसके अलावा कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस के कर्मी और अन्य सुरक्षा बलों को भी तैनात किया जाएगा. विशेष ध्यान संवेदनशील इलाकों पर दिया जाएगा जहां पहले हिंसक वारदातें हो चुकी हैं. कर्नाटक दावा करता रहा है कि कृष्णराज सागर बांध में सिर्फ उतना पानी है जो केवल बंगलुरु की आवश्यकता को पूरी करता है.

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इसके अलावा होसुर में दो डीएसपी और 100 जवानों की तैनाती की गई है. हाईलेवल मीटिंग कर लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है. तमिलनाडु में भी इस फैसले को लेकर सरकार अलर्ट है. तमिलनाडु में 5 लाख किसान, खेती से जुड़े 18 लाख कामगार, सिंचाई और तमाम क्षेत्रों से जुड़े लोग कावेरी विवाद से संबंध रखते हैं. चेन्नई में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है.

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