दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर एक बार फिर पंजाब के किसानों पर पराली जलाने के आरोप लग रहे हैं. इस पर भारतीय किसान यूनियन (BKU) लक्खोवाल के प्रधान हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने नाराजगी जताई है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब भी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ता है तो उसका पूरा ठीकरा किसानों के सिर क्यों फोड़ दिया जाता है? उन्होंने सरकार से मांग की है कि पराली नहीं जलाने वाले किसानों को सीधे आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि उन्हें फसल अवशेषों के प्रबंधन में होने वाले नुकसान की भरपाई मिल सके.
हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि प्रदूषण के लिए सिर्फ किसान जिम्मेदार नहीं हैं. देशभर में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य हो रहे हैं और सड़कों पर वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. इन गतिविधियों से निकलने वाला प्रदूषण भी हवा को प्रभावित करता है. इसके अलावा मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण बढ़ने की एक वजह हैं. इन दिनों हवा ऊपर नहीं उठ पाती, जिसके कारण प्रदूषित कण वातावरण में बने रहते हैं.
छोटे किसानों को मिले डायरेक्ट सब्सिडी
BKU नेता ने कहा कि किसान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की हिदायतों के मुताबिक पराली प्रबंधन करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सरकार को आर्थिक मदद देनी होगी. उन्होंने कहा कि सब्सिडी पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराने से समस्या का समाधान नहीं हो रहा है, क्योंकि छोटे किसानों तक ये मशीनें नहीं पहुंच पाती हैं.
उन्होंने मांग की कि दो, चार और पांच एकड़ जमीन वाले किसानों को सीधे सब्सिडी दी जाए. इससे पराली नहीं जलाने के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई हो सकेगी और किसान फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन कर सकेंगे.
समय की कमी में पराली जलाने को मजबूर किसान
हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने कहा कि पराली प्रबंधन के बाद अगली फसल की बुवाई के लिए किसानों के पास बहुत कम समय बचता है. इसी मजबूरी में कई किसान पराली जलाने का रास्ता अपनाते हैं. उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों की परिस्थितियों को समझा जाए और मजबूरी में पराली जलाने के मामलों में उनके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें उचित आर्थिक सहायता और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं.
विवेक ढल्ल