ChatGPT ने गुमशुदा को अपनों से मिलाया... बुजुर्ग की हैरान करने वाली कहानी

अमृतसर से गलती से बिहार पहुंच गए बुजुर्ग चमन लाल को एक स्थानीय निवासी नीरज ने अपने घर में रखा और उनकी मदद के लिए ChatGPT के जरिये उनके गांव का पता लगाया.

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अमृतसर से गलती से गया पहुंचे बुजुर्ग को युवक ने चैटजीपीटी की मदद से घर पहुंचाया अमृतसर से गलती से गया पहुंचे बुजुर्ग को युवक ने चैटजीपीटी की मदद से घर पहुंचाया

विवेक ढल्ल

  • लुधियाना,
  • 20 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:33 PM IST

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई टेक्नॉलजी किसी के लिए खुशियों की वजह बन सकती है,  ये खबर इसकी दिलचस्प मिसाल है. हुआ यूं कि एक अमृतसर से भटके एक बुजुर्ग गलती से बिहार पहुंच गए. एक अजनबी ने उन्हें अपने घर में पनाह दी और उनसे लगातार उनके गांव-शहर का नाम पूछता रहा. बुजुर्ग याद्दाश्त कमजोर होने की वजह से जो भी थोड़ा बहुत बता सके, उसी जानकारी को शख्स ने चैटजीपीटी पर खोजा और फिर इसके जरिए खोजबीन करके बुजुर्ग को उनके परिवार से मिला दिया.

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ये कहानी है लुधियाना के फतेहगढ़ गुजरां गांव निवासी बुजुर्ग चमन लाल की. चमन लाल  अमृतसर में तीर्थ यात्रा के दौरान अपने साथियों से बिछड़ गए थे. वह गलती से अमृतसर रेलवे स्टेशन से बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गए और गया पहुंच गए. यहां एक अजनबी ने उन्हें सहारा दिया, चार दिन तक अपने घर में रखा और फिर चमन लाल के बताए गांव के नाम को ChatGPT पर तलाशना शुरू किया. 

चमन लाल 11 सितंबर को पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत अमृतसर स्थित श्रीहरमंदिर साहिब के दर्शन के लिए गए थे. परिवार के मुताबिक, चमन लाल को याद्दाश्त से जुड़ी परेशानी है. अमृतसर में वह तीर्थ यात्रा पर गए अन्य लोगों से अलग हो गए और भटकते हुए रेलवे स्टेशन की तरफ पहुंच गए. इसी दौरान वह बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गए और गया पहुंच गए.

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गया में अजनबी ने दिया सहारा

गया रेलवे स्टेशन के पास स्थानीय निवासी नीरज की नजर चमन लाल पर पड़ी. बुजुर्ग परेशान और भूखे थे और अपना पूरा पता नहीं बता पा रहे थे. नीरज के मुताबिक, चमन लाल सिर्फ अपने गांव का नाम फतेहगढ़ गुजरां बता पा रहे थे. नीरज उन्हें अपने घर ले गए. उन्हें खाना खिलाया और करीब चार दिन तक अपने परिवार के साथ रखा. इसके साथ ही उन्होंने बुजुर्ग के परिवार और गांव का पता लगाने की कोशिश शुरू कर दी.

पंजाबी बोली और गांव के नाम से शुरू हुई तलाश

चमन लाल पंजाबी बोल रहे थे. नीरज ने उनके बताए गांव के नाम के आधार पर पंजाब में तलाश शुरू की. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने करीब तीन दिनों तक ChatGPT और इंटरनेट पर अलग-अलग सर्च किए. आखिरकार उन्हें पता चला कि फतेहगढ़ गुजरां गांव लुधियाना जिले में माछीवाड़ा साहिब के पास है. गांव का पता चलने के बाद नीरज ने बुजुर्ग को अकेले भेजने के बजाय खुद उन्हें पंजाब पहुंचाने का फैसला किया.

गया से लुधियाना और फिर माछीवाड़ा पहुंचे

नीरज चमन लाल को अपने साथ लेकर गया से लुधियाना पहुंचे और फिर माछीवाड़ा इलाके में उनकी तस्वीर दिखाकर लोगों से गांव के बारे में पूछताछ करने लगे. इसी दौरान मास्टर कृष्ण लाल नाम के स्थानीय व्यक्ति ने चमन लाल को पहचान लिया. उन्होंने चमन लाल की तस्वीर सोशल मीडिया पर पहले देख रखी थी. इसके बाद उन्होंने उनके परिवार से संपर्क किया.

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सूचना मिलने पर चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह माछीवाड़ा पहुंचे और अपने दादा को पहचान लिया. इस तरह अमृतसर से लापता हुए चमन लाल कई दिनों बाद अपने परिवार से मिल सके. नीरज के मुताबिक, वह गया में निर्माण क्षेत्र में काम करते हैं. उनका कहना है कि जब उन्होंने रेलवे स्टेशन के पास बुजुर्ग को अकेले और परेशान हालत में देखा तो उन्होंने उनकी मदद करने का फैसला किया. गांव का पता चलने के बाद उन्होंने परिवार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी खुद उठाई.

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