परिसीमन बिल के लिए संसद का विशेष सत्र बुला सकती है सरकार, ये है प्लान

केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है. मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है, लेकिन इसके बाद सत्रावसान (प्रोरोगेशन) नहीं किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जल्द ही संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सके.

Advertisement
डिलिमिटेशन बिल पर सरकार अलग से सत्र बुला सकती है डिलिमिटेशन बिल पर सरकार अलग से सत्र बुला सकती है

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:20 PM IST

केंद्र सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है. मौजूदा मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होना है, लेकिन इसके बाद सत्रावसान (प्रोरोगेशन) नहीं किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर जल्द ही संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सके.

बताया जा रहा है कि सरकार संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त समर्थन का भरोसा मिलेगा, 16 अगस्त से तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

Advertisement

16 अगस्त से विशेष सत्र!

सरकार की तरफ से कांग्रेस समेत विपक्ष को विशेष सत्र का प्रस्ताव दिया गया है. सरकार ने कांग्रेस को कहा है कि सरकार 16,17,18 से संसद का विशेष सत्र परिसीमन बिल पर बुलाना चाहती है. सरकार के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस ने कहा है की पार्टी और विपक्ष के दूसरे दलों से चर्चा करके बताएंगे.

आइए, इससे पहले समझते हैं कि परिसीमन बिल है क्या?

संसद में बीते सत्र में तीन बिल पेश किए गए थे, जिनके जरिए लोकसभा सीटों में विस्तार होना है. इनका मकसद लोक सभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई यानी 33 फीसदी आरक्षण जल्दी लागू करना और नए सिरे से परिसीमन करना है. इसके बाद देश में लोकसभा सीटें 800 से ज्यादा हो सकती हैं.

इन तीन बिलों में एक बिल परिसीमन विधेयक-2026 है. इसके जरिए नया परिसीमन आयोग बनेगा, जो नई जनसंख्या के आधार पर सीटों की सीमाएं और बंटवारा तय करेगा. इसके बाद से हर राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ जाएगी.

Advertisement

क्या होता है परिसीमन?
परिसीमन का मतलब है चुनाव लड़ने के क्षेत्रों की सीमाएं और संख्या तय करना या बदलना. यानी चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं में बदलाव को ही परिसीमन कहते हैं. सरकार इन सीमाओं में बदलाव करती रहती है, जो वहां की जनसंख्या और वहां के इलाके के जनसंख्या घनत्व के आधार पर तय की जाती है. ये नगर निगम के वार्ड से लेकर लोकसभा सीटों तक होता है. जैसे अगर आप लखनऊ में रहते हैं तो वहां की लोकसभा सीट की एक सीमा होगी, जिसमें रहने वाले लोग उस सीट के जनप्रतिनिधि को चुनेंगे. इस सीमा में बदलाव परिसीमन के जरिए होता है. जैसे आपने देखा होगा कि आपका इलाका कई सालों से वार्ड नंबर-10 में आता होगा और परिसीमन के बाद से वार्ड नंबर-12 में आने लगे.

इस बिल के आने से क्या होगा?
इस बिल के पास होने से संविधान के कुछ अनुच्छेदों में बदलाव किया जाएगा, ताकि सीटों का बंटवारा मौजूदा जनसंख्या के हिसाब से हो सके. विधेयक के अनुसार, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 815 हो सकती है. इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 तक सीटें हो सकती हैं. यानी कुल 850 सीटें. अभी सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर तय है, जबकि देश की आबादी और हालात काफी बदल चुके हैं.

Advertisement

सरकार का कहना है कि लंबे समय से सीटों का नया बंटवारा रुका हुआ था. इस विधेयक से वह रोक हटेगी और एक परिसीमन आयोग बनेगा, जो नए चुनावी क्षेत्र तय कर सकेगा. नए विधेयक में प्रावधान है कि नवीनतम उपलब्ध जनगणना आंकड़ों के आधार पर परिसीमन कर महिला आरक्षण लागू किया जा सकेगा. आरक्षित सीटें अलग-अलग चुनावों में बदलती रहेंगी, ताकि सभी क्षेत्रों में महिलाओं को मौका मिल सके. परिसीमन विधेयक का उद्देश्य देश में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों का पुनर्गठन करना है.

इस विधेयक के तहत नवीनतम जनगणना के आंकड़ों के आधार पर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को मिलने वाली सीटों की संख्या बदली जाएगी. साथ ही, संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं नए सिरे से तय की जाएंगी, ताकि हर क्षेत्र में जनसंख्या के अनुसार संतुलन बनाया जा सके.

आखिरी बार परिसीमन कब हुआ था?
पहले 489 सीटें थीं, इसके बाद 1963 में 522 (1961 की जनसंख्या के आधार पर) सीटें हुईं. फिर 1973 में 1971 के आधार पर 543 सीटे हुईं. वो आजतक वैसे ही है. इसके बाद 2001 तक सीटों के बंटवारे को फ्रीज कर दिया गया था और बाद में संशोधन के जरिए इसे 2026 तक बढ़ा दिया गया था. साल 2002 में परिसीमन हुआ था, लेकिन सीटों की संख्या में नहीं बल्कि सीमा में बदलाव हुआ था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »