'अर्बन नक्सल' के बाद अब 'दिमागी नक्सल' शब्द को लेकर सियासत गरमा गई है. CPI(M) नेता एमए बेबी ने सरकार पर विरोध करने वालों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. साथ ही नक्सल विरोधी कार्रवाई को 'सरकारी आतंकवाद' बताया है. उनका यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के भाषण के बाद आया है.
दरअसल, पीएम मोदी ने लाल किले से कहा था कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा चुकी है. हालांकि, वैचारिक स्तर पर चुनौती अभी बाकी है. इसी दौरान उन्होंने 'दिमागी नक्सल' शब्द का इस्तेमाल किया था.
'विरोध करने वालों को नक्सल बताया जा रहा'
एमए बेबी का आरोप है कि पहले BJP और RSS की आलोचना करने वालों को 'अर्बन नक्सल' कहा जाता था. अब इसी तरह 'दिमागी नक्सल' का नया टैग इस्तेमाल हो रहा है. उनके मुताबिक, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले लोगों को इस तरह निशाना बनाया जा रहा है.
अपने बयान में उन्होंने गिरीश कर्नाड की बात की, जो एक सार्वजनिक कार्यक्रम में 'अर्बन नक्सल' लिखा टैग पहनकर गए थे. इसके अलावा उन्होंने एमएम कलबुर्गी, गोविंद पानसरे और गौरी लंकेश की हत्याओं का भी जिक्र किया. उनका सीधा आरोप है कि जो भी बीजेपी या RSS की आलोचना करता है, उस पर हमले किए जाते हैं.
नक्सल विरोधी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एमए बेबी ने कहा कि सरकार माओवादियों को खत्म करने की बात करती है, लेकिन इसके लिए अपनाए गए तरीके पर चर्चा होनी चाहिए. उनका आरोप है कि युवा लड़के-लड़कियों को पकड़ा गया. इन्हें कानूनी प्रक्रिया से गुजारने के बजाय गोली मार दी गई, फिर मामलों को एनकाउंटर बताया गया.
उन्होंने इस कार्रवाई को 'सरकारी आतंकवाद' करार दिया. उनके मुताबिक, माओवादियों से निपटने के लिए केवल सैन्य कार्रवाई ही रास्ता नहीं था. बातचीत के जरिए हथियार छोड़ने वालों को मुख्यधारा में लाने की कोशिश भी हो सकती थी.
PM को लिखा था पत्र
एमए बेबी के अनुसार, डी राजा और दीपांकर भट्टाचार्य के साथ उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था. इसमें माओवादियों की हिंसा से असहमति साफ की गई थी. साथ ही यह बात रखी गई थी कि जो लोग हथियार छोड़ने को तैयार हैं, उनसे बातचीत की जाए.
उनका कहना है कि ऐसे लोगों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए मुख्यधारा में लाया जा सकता था. इसी बात को लेकर उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए.
पीएम मोदी ने 'दिमागी नक्सल' पर क्या कहा?
15 अगस्त को लाल किले से पीएम मोदी ने कहा था कि नक्सलवाद ने लंबे समय तक देश के बड़े हिस्से को प्रभावित किया. इस हिंसा में युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ, जबकि कई परिवारों ने अपने बेटे खोए.
पीएम मोदी के मुताबिक, 2014 के बाद नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में उठाए गए कदमों का असर अब जमीन पर दिख रहा है. जिन इलाकों में पहले हिंसा होती थी, वहां विकास का माहौल बना है.
हालांकि, पीएम मोदी ने वैचारिक चुनौती को लेकर भी आगाह किया. उनका कहना था कि माओवादी सोच रखने वाले कुछ लोग सत्ता के गलियारों में जगह बनाकर नीतियों को प्रभावित करते रहे. अब यही 'दिमागी नक्सल' नए तरीकों से युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
पीएम मोदी के इस बयान पर विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी. कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने X पर लिखा कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है.
वहीं, जयराम रमेश ने भी 'अर्बन नक्सल' शब्द का मुद्दा उठाया. उनका कहना था कि कुछ साल पहले प्रधानमंत्री इस शब्द का इस्तेमाल करते थे. संसद में जब इसकी परिभाषा पूछी गई थी, तब गृह मंत्री की ओर से कहा गया था कि 'अर्बन नक्सल' जैसी कोई तय परिभाषा नहीं है.
अब 'दिमागी नक्सल' शब्द को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. सरकार इसे वैचारिक चुनौती बता रही है, जबकि विपक्ष इसे आलोचकों को निशाना बनाने वाला टैग बता रहा है.
आशुतोष मिश्रा