संसद के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन, लोकसभा में भारत की अर्थव्यवस्था पर सवाल किया गया, जिसके जवाब में सदन का माहौल थोड़ा गर्मा गया. तेलंगाना से कांग्रेस सांसद अनुमुला रेवंत रेड्डी ने प्रश्नकाल को दौरान प्रधानमंत्री मोदी के एक पुराने बयान को सामने रखकर देश की अर्थव्यवस्था पर सवाल किया. जिसके जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश की मज़बूत अर्थव्यवस्था को देखकर कुछ लोगों को जलन हो रही है.
तेलंगाना से कांग्रेस सांसद अनुमुला रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री मोदी के एक पुराने बयान को सामने रखा, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'रुपया ICU में पड़ा है, देश का दुर्भाग्य है कि दिल्ली सरकार को देश की चिंता नहीं है.' उन्होंने आगे कहा कि आज सरकार को अपनी कुर्सी बचाने की चिंता है. रुपए गिरने की कोई चिंता नहीं है, कोई एक्शन प्लान नहीं है. जब डॉलर की कीमत 66 रुपए थी, तब इन्होंने कहा था कि रुपया ICU में है, अब रुपये की कीमत 83.20 है. उन्होंने कहा की ICU से दो रास्ते जाते हैं- एक ठीक होकर घर वापस आना और दूसरा मुर्दाघर जाने का. तो अब अगर रुपया 83.20 है तो मतलब हम सीधा मॉर्चुरी में जा रहे हैं. इसपर उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से सवाल किया कि रुपए को मॉर्चुरी से वापस लाने का क्या कोई एक्शन प्लान है?
'बहुत सारे लोगों को इससे दिक्कत है'
इसपर वित्त मंत्री ने कहा 'जब प्रभानमंत्री मुख्यमंत्री थे, उस दौर का बयान उठाकर ये सवाल पूछ रहे हैं, बहुत सही है. पूछना चाहिए ये सवाल.' इसपर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा, 'ये मैं तय करूंगा कि किसी को क्या पूछना है और क्या नहीं. निर्मला सीतारमण ने आगे कहा कि अगर रेड्डी कोटेशन के साथ, उस जमाने के बाकी सब इंडिकेटर्स को भी याद दिलाते, तो अच्छा था. उन्होंने कहा कि उस वक्त पूरी इकोनॉमी ICU में थी. पूरी दुनिया में भारत को फ्रेजाइल फाइव में रखा गया था और उस समय हमारा फॉरेन एक्चेंज रिज़र्व एकदम नीचे था. बहुत सारे लोगों को इससे दिक्कत है.
' जब देश आगे बढ़ा रहा है, तो उसपर गर्व होना चाहिए'
उन्होंने आगे कहा, 'महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बावजूद भी, आज भारत की इकोनॉमी तेजी से बढ़ने वाली इकोनॉमी है. लेकिन कुछ लोगों को इससे जलन हो रही है. दुख की बात है कि इसपर जलने वाले लोग हमारे सदन में हैं. जब देश आगे बढ़ा रहा है, तो उसपर गर्व होना चाहिए, न कि मजाक उड़ाना चाहिए. पूरा डॉलर विदेश में स्ट्रागं हो रहा है, सिर्फ भारत उसके खिलाफ खड़ा हो रहा है. इस बात का आनंद लेना चाहिए, न कि मजाक उड़ाना चाहिए.' इसके बाद लोकसभा में काफी हंगामा हुआ.
अनुमुला रेवंत रेड्डी ने सप्लीमेंट्री सवाल किया- '1947 से लेकर 65 सालों में रही सरकारों ने 55,87,149 करोड़ का लोन लिया था. लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार ने अपनी सरकार में अब तक 18,00,744 करोड़ का कर्ज लिया है. हर साल 10 हजार करोड़ उधार मांगकर जी रहे हैं, इस देश का पूरा सर्वनाश कर दिया इस सरकार ने. अगर रुपए को मजबूत करना है तो फॉरन इनवेस्टर को देखना है इसमें आपका एक्शन प्लान क्या है?'
'भारतीय रुपया हर करंसी के मुकाबले मजबूत हुआ है'
इसके जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि करंसी डीवैल्युएशन शब्द का इस्तेमाल तब होता है, जब कोई फिक्स्ड एक्सचेंज रेट मैकेनिज़्म होता है. आज भारत में फिक्स्ड एक्सचेंज रेट मैकेनिज़्म नहीं है. अगर कोई रेट कम होता है तो हम बात करते हैं डिप्रेसिएशन और एप्रीसिएशन की. डीवैल्युएशन इसमें नहीं आता है.
उन्होंने आगे कहा, 'मैंने बहुत साफ तौर पर समझाया है कि भारतीय रुपया हर करंसी के मुकाबले मजबूत हुआ है और यह साबित भी हुआ है. डॉलर के मामले में, यूएस फेड द्वारा अपनाई गई नीतियों की वजह से डॉलर मजबूत होता जा रहा है. अब फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व की बात करें, तो RBI ने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का इस्तेमाल इसलिए किया, ताकि वे मार्केट में हस्तक्षेप करके यह पक्का कर सके कि डॉलर और रुपए के बीच का फ्लक्चुएशन बहुत ज्यादा न हो. क्योंकि अगर फ्लक्चुएशन बहुत ज्यादा हो जाएगा तो इससे काफी परेशानी हो सकती है. लेकिन आज देखेंगे कि पिछले कुछ सप्ताह से FDI और FII के फ्लो की वजह से कई रिजर्व ऊपर उठ रहे हैं. सच ये है कि रिजर्व भी भपर जा रहे हैं, इसलिए ये जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं वे डेटा के माध्यम से साबित नहीं होते.
पारुल चंद्रा