सारा अली खान को लेकर जारी फतवे पर भड़के हरीश रावत, बोले- कट्टरपंथिता समाज और देश को कहां ले जाएगी

कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने पर जारी फतवे की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि धर्मपरायण होना अलग बात है और कट्टरपंथी होना अलग. किसी को भी अपनी आस्था रखने से नहीं रोकना चाहिए. हरीश रावत ने कहा कि हिंदुओं और मुसलमानों दोनों में कट्टरपंथी लोग हैं, जो केवल चर्चा में आने के लिए समाज को नुकसान पहुंचाते हैं.

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हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी. (File Photo- ITG) हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी. (File Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:49 PM IST

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने अभिनेत्री सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने पर जारी फतवे को लेकर नाराजगी जताई है. उन्होंने सारा अली खान का समर्थन करते हुए कहा कि किसी को भी अपनी आस्था रखने से क्यों रोका जाना चाहिए? धार्मिक होना अलग बात है और कट्टर होना अलग.

हरीश रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि एक समाचार पत्र में सारा अली खान को लेकर चिंताजनक बयान पढ़ने को मिला. सारा अली खान श्रद्धापूर्वक केदारनाथ पहुंचती हैं. वह पिछली बार भी गई थीं और इस बार भी पहुंचीं. वह नवाब पटौदी और शर्मिला टैगोर की पोती और सैफ अली खान की बेटी हैं. उनकी अपनी आस्था है, लेकिन साथ ही वह उस धर्म का भी पालन करती हैं जो उन्हें अपने पिता से मिला है.

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'आस्था रखने से किसी को क्यों रोक रहे हैं?'

कांग्रेस नेता ने कहा कि कुछ लोग सारा अली खान के केदारनाथ जाने को लेकर फतवा जारी कर रहे हैं. कट्टरपंथिता समाज और देश को कहां लेकर जाएगी, इस पर विचार करने की जरूरत है. धर्मपरायण होना एक बात है और कट्टर होना दूसरी बात. उन्होंने कहा, 'आप मुलायम रहकर भी धर्मपरायण हो सकते हैं. अपने धर्म का पालन करिए और उसके गुणों का प्रचार करिए. मगर कोई किसी देवता में आस्था रख रहा है तो आप उसे आस्था रखने से क्यों रोक रहे हैं?'

पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वह जानते हैं कि इस्लाम में मूर्ति पूजा नहीं होती है, लेकिन आस्था और मूर्ति पूजा में अंतर है. हो सकता है कि कोई मंदिर में जाकर ध्यान लगाते हुए अल्लाह को भी याद कर रहा हो. दुनिया में सभी भूमि नारायण की है, सभी भूमि अल्लाह की है और सभी भूमि गॉड की है.

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हरीश रावत ने कहा कि कट्टरपंथिता से समाज और भारत पहले से ही दुखी है. ऐसे लोग दोनों तरफ हैं. हिंदुओं में भी ऐसे लोग हैं और मुसलमानों में भी. वे केवल चर्चा में आने के लिए समाज को नुकसान पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे लोग न हिंदुओं के हितैषी हैं और न मुसलमानों के. यहां तक कि वे अपने धर्म के भी हितैषी नहीं हैं.

क्या है सारा अली खान को लेकर विवाद?

दरअसल, बरेली के मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सारा अली खान के केदारनाथ मंदिर जाने और वहां पूजा-पाठ करने पर फतवा जारी किया है. मौलाना का कहना है कि इस्लामिक शरीयत के मुताबिक किसी मुस्लिम महिला या पुरुष का दूसरे धर्म के धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत पूजा-पाठ करना जायज नहीं है.

उन्होंने सारा अली खान के मंदिर जाने और पूजा करने को शरीयत की नजर में गलत बताते हुए उनसे तौबा करने और खुदा से माफी मांगने की बात कही है. इसी बयान पर अब हरीश रावत ने सवाल उठाते हुए धार्मिक कट्टरता के बजाय आपसी सम्मान और आस्था की आजादी की बात कही है.

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