भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस और उनके दावों पर तीखा हमला बोला है. सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयानों, राजनीतिक समझ, एंटी-इंकंबेंसी के दावों और चुनाव आयोग को लेकर उठाए गए सवालों पर पलटवार किया.
उन्होंने कहा कि एंटी इनकंबेंसी सिर्फ बीजेपी के खिलाफ नहीं रही है, बल्कि कई राज्यों में कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता से बाहर रही है. त्रिवेदी ने राहुल गांधी के राजनीतिक ज्ञान पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें भारतीय राजनीति की बुनियादी जानकारी नहीं है.
सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के उस बयान पर चुटकी ली, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे 50 सालों से राजनीति को समझ रहे हैं. त्रिवेदी ने कहा, 'उनकी खुद की उम्र 56 वर्ष है और वे कह रहे हैं कि 50 साल से राजनीति देख रहे हैं. 5-6 साल की उम्र में राजनीति समझने की अद्भुत प्रतिभा सिर्फ पक्की दाढ़ी वाले नौजवान में हो सकती है. राजनीतिक दृष्टि से राहुल गांधी का ज्ञान शून्य है और उन्हें भारतीय राजनीति की बुनियादी जानकारी नहीं है.'
एंटी-इंकंबेंसी को लेकर राहुल के दावों को खारिज करते हुए बीजेपी प्रवक्ता ने आंकड़ों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु में 1967, पश्चिम बंगाल में 1977, उत्तर प्रदेश और बिहार में 1990 तथा ओडिशा में 1999 के बाद से कांग्रेस की वापसी नहीं हुई है. त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को इन तथ्यों की जानकारी नहीं है.
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'पारदर्शी चुनाव के बाद कांग्रेस को परेशानी'
बीजेपी नेता ने कहा कि जिस दौर में वोटर आईडी कार्ड नहीं थे, बूथ कैप्चरिंग और बैलेट बॉक्स लूटने जैसी घटनाएं होती थीं, उस समय भी कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में रही. जब से चुनाव पारदर्शी हुए, CCTV कैमरे आए, केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती होने लगी और स्वतंत्र मीडिया व न्यायपालिका की भूमिका बढ़ी, तब से कांग्रेस के सत्ता में आने के लाले पड़ गए हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि असली एंटी-इंकंबेंसी किसी और के नहीं, बल्कि खुद गांधी परिवार के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि रायबरेली और अमेठी जैसी गांधी परिवार की पारंपारिक सीटें पिछले 25 वर्षों से समाजवादी पार्टी के समर्थन से जीती जा रही हैं, जबकि वायनाड की सीट पर जीत के लिए वे मुस्लिम लीग के समर्थन पर निर्भर हैं. अपनी बदहाली छुपाने के लिए कांग्रेस नेता दूसरे दलों की बैसाखियों का सहारा ले रहे हैं और राजनीतिक आधार खो चुके हैं.
वोटर लिस्ट को लेकर राहुल गांधी पर सवाल
वोटर लिस्ट में बदलाव और चुनाव आयोग से जुड़े राहुल गांधी के आरोपों पर सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि जिन मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया जा रहा है, उनमें किसी चुनाव आयुक्त का बयान नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि जब किसी चुनाव आयुक्त का बयान या रिकॉर्ड पर प्रतिक्रिया नहीं है तो इन दावों का आधार क्या है.
उन्होंने रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 21(3) का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को अपनी व्यवस्था के अनुसार मतदाता सूची का पुनरीक्षण (SIR) कराने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 में माता-पिता के नाम से जुड़े किसी बदलाव की बात भी स्पष्ट नहीं की गई है.
त्रिवेदी ने कहा कि अगर 18 साल का कोई व्यक्ति मतदाता बनने के लिए आता है और उसके माता-पिता या परिवार का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है तो उसका सत्यापन होना चाहिए. उन्होंने कहा कि बिना सत्यापन के किसी को वोटर बनाने की बात लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ है.
उन्होंने अमेरिकी एजेंसी USAID की फंडिंग को लेकर भी सवाल उठाए और पूछा कि भारत में वोटर टर्नआउट बढ़ाने के लिए किसी विदेशी एजेंसी को फंडिंग क्यों करनी चाहिए.
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'चुनाव आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए'
त्रिवेदी ने कहा कि चुनाव आयोग में तीन सदस्य होते हैं और किसी फैसले के लिए बहुमत जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है कि चुनाव आयोग के फैसले बहुमत के आधार पर हुए और किसी आयुक्त ने असहमति जताई हो. इन मुद्दों को सुप्रीम कोर्ट के सामने भी रखा गया था और कोर्ट ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों को बरकरार रखा.
T.N. शेषन का भी किया जिक्र
सुधांशु त्रिवेदी ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का जिक्र करते हुए एक पुराने वीडियो का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि शेषन उस समय कैबिनेट सचिव थे और उन्होंने बताया था कि चुनाव की तारीख तय करना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है. त्रिवेदी ने राहुल गांधी की उम्र और उनके पुराने बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें सात साल की उम्र की बातें याद होने का दावा है, लेकिन भारतीय राजनीति के कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी नहीं है.
बीजेपी के विस्तार का भी किया जिक्र
बीजेपी नेता ने कहा कि बीजेपी का विस्तार कई दशकों में हुआ है. उन्होंने 1950 के दशक से लेकर 2010 के दशक तक पार्टी के राजनीतिक सफर का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 1960 के दशक में जनसंघ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनी, 1970 के दशक में केंद्र में सत्ता की भागीदार बनी और कई राज्यों में उसकी सरकारें बनीं. इसके बाद 1990 के दशक में बीजेपी प्रमुख विपक्षी पार्टी बनी और 2000 के दशक में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया.
उन्होंने कहा कि 2010 के दशक में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने केंद्र में बहुमत की सरकार बनाई.
'भारत की अर्थव्यवस्था ने भी लंबी छलांग लगाई'
त्रिवेदी ने राहुल गांधी के 'ऐसा समय कभी नहीं आया' वाले बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है. उन्होंने भारत की आर्थिक वृद्धि, शेयर बाजार, ऑटोमोबाइल, मोबाइल हैंडसेट निर्माण और डिजिटल ट्रांजेक्शन का जिक्र किया.
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस जिस तरह के सवाल उठा रहे हैं, वह भारत की मौजूदा स्थिति को समझने में उनकी असमर्थता को दिखाता है. सुधांशु त्रिवेदी ने 2010 के बिहार विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि उस चुनाव में कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन उसे सिर्फ 4 सीटों पर जीत मिली और 234 सीटों पर उसके उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई.
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