सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें मुंबई के बॉम्बे अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया है. महाराष्ट्र के रालेगण सिद्धि के पास एक स्थानीय अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन स्वास्थ्य में गिरावट आने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए मुंबई शिफ्ट किया गया. फिलहाल डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है.
बताया जा रहा है कि अन्ना हजारे को गंभीर वायरल संक्रमण और शरीर में पानी की अत्यधिक कमी यानी एक्यूट डिहाइड्रेशन की शिकायत हुई है. इसके बाद उन्हें मुंबई लाने का फैसला किया गया. बॉम्बे अस्पताल में उन्हें डॉ. गौतम भंसाली की निगरानी में भर्ती कराया गया है. डॉक्टर फिलहाल 89 वर्षीय अन्ना हजारे की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत आकलन कर रहे हैं. जांच के नतीजों के आधार पर आगे के इलाज को लेकर फैसला किया जाएगा. उन्हें ICU में डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है. उनकी सेहत को लेकर अभी और जानकारी का इंतजार है.
जंतर-मंतर प्रदर्शन के समर्थन में आए थे अन्ना
देश में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और भूख हड़तालों के जरिए पहचान बनाने वाले अन्ना हजारे हाल ही में NEET पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के समर्थन में सामने आए थे. उन्होंने 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों के संसद मार्च के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और हिंसा की निंदा की थी. अन्ना हजारे ने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा था. उन्होंने केंद्र सरकार से प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ बातचीत करने और उनकी चिंताओं का समाधान निकालने की अपील की थी.
पीएम मोदी को लिखे पत्र में हजारे ने हिंसा और पुलिस कार्रवाई की खबरों को 'दुखद' बताया था. उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और गैरजरूरी बल प्रयोग के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
अन्ना हजारे ने अपनी चिट्टी में पेपर लीक, भर्ती प्रक्रियाओं में देरी और बेरोजगारी समेत युवाओं से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया था. उनका कहना था कि युवाओं की इन चिंताओं को केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. ये मुद्दे समाज में मौजूद व्यापक असंतोष और युवाओं की अपेक्षाओं को भी दर्शाते हैं. उन्होंने अहिंसा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा था, 'मैंने अपने जीवन में 22 भूख हड़तालें की हैं और उनमें कभी कोई हिंसा नहीं हुई.'
अन्ना हजारे ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे लोगों के प्रति एकजुटता जताने के लिए दो घंटे का मौन प्रदर्शन भी किया था. उन्होंने 23 जुलाई को सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक मौन रहकर प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया था.
अन्ना हजारे करीब डेढ़ दशक पहले 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' (IAC) आंदोलन के जरिए राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए थे. भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके आंदोलन और अनशन ने उस समय देश की राजनीति और सामाजिक विमर्श पर व्यापक असर डाला था.
साहिल जोशी