ममता राज में बांटे गए 45 हजार जाति प्रमाण पत्र रडार पर, अब होगी जांच

पश्चिम बंगाल सरकार ने टीएमसी शासन के दौरान जारी जाति प्रमाण पत्रों की बड़े स्तर पर जांच शुरू की है, जिसमें अब तक 122,117 प्रमाण पत्रों का दोबारा सत्यापन हुआ, 76,750 सही पाए गए, 45000 से ज्यादा आगे की जांच में भेजे गए हैं.

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Photo- ITG) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:52 AM IST

पश्चिम बंगाल सरकार ने टीएमसी यानी ममता बनर्जी के शासन के दौरान जारी किए गए जाति प्रमाण पत्रों की बड़े स्तर पर शुभेंदु अधिकारी सरकार में जांच शुरू हो गई है. वरिष्ठ अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि 45000 से ज्यादा प्रमाण पत्रों को आगे की जांच के लिए चिह्नित किया गया है और 135 प्रमाण पत्र अब तक रद्द किए जा चुके हैं.

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अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 1,22,117 जाति प्रमाण पत्रों का दोबारा सत्यापन किया गया है. इनमें 76,750 प्रमाण पत्र, यानी करीब 62.8 प्रतिशत, सही पाए गए हैं. यह पूरी कवायद टीएमसी शासन के दौरान ओबीसी, एससी और एसटी प्रमाण पत्र जारी करने में बड़े स्तर पर गड़बड़ी के आरोपों के बाद शुरू हुई है.

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असली हकदारों के पास ही रहें जाति प्रमाण पत्र

राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस जांच का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जाति प्रमाण पत्र सिर्फ असली हकदारों के पास ही रहें. अधिकारी के मुताबिक, हर प्रमाण पत्र की जांच तय नियमों के मुताबिक की जा रही है. जहां भी गड़बड़ी मिलेगी, वहां कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य प्रमाणन व्यवस्था की साख बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि लाभ सिर्फ पात्र लोगों तक पहुंचे.

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एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पिछले शासन के दौरान जारी सभी जाति प्रमाण पत्रों की जांच के निर्देश दिए थे. जांच में सामने आया कि अलग-अलग बूथ इलाकों में लगे दुआरे सरकार कैंपों के जरिए बड़ी संख्या में जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए थे और आरोप है कि इनमें से कई बिना सही जांच के दे दिए गए.

बांकुड़ा में हुल दिवस पर एक जनसभा को संबोधित करते हुए अधिकारी ने चेतावनी दी थी कि अगर कोई जाति प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से लिया गया पाया गया, तो उसे जारी करने वाला और लेने वाला, दोनों गिरफ्तारी का सामना करेंगे.

कम समय में प्रोसेस किए गए प्रमाण पत्रों पर ज्यादा खतरा

पहले चरण में प्रशासन ने दुआरे सरकार कैंपों के जरिए जारी किए गए उन प्रमाण पत्रों पर ध्यान दिया, जिन्हें एक हफ्ते या उससे कम समय में प्रोसेस किया गया था. राज्य सचिवालय के एक और वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि तय प्रक्रिया के तहत आवेदक के दस्तावेजों की जांच जरूरी होती है.

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इसके साथ ही क्षेत्र स्तर पर जांच और आवेदक के इलाके में सुनवाई भी करनी होती है, तभी प्रमाण पत्र जारी किया जाता है. अधिकारी के मुताबिक, कई मामलों में यह जरूरी प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं, इस पर सवाल खड़े हुए हैं.

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सरकार का मानना है कि पिछले शासन के दौरान प्रक्रिया को आसान बनाए जाने से कई स्तर पर चूक हुई हो सकती है, जिसकी वजह से कुछ अपात्र लोग भी जाति प्रमाण पत्र लेने में सफल रहे. फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जहां भी गड़बड़ी साबित होगी, वहां आगे की कार्रवाई की जाएगी. अब तक 1,22,117 प्रमाण पत्रों की जांच हो चुकी है, 76,750 सही पाए गए हैं, 45000 से ज्यादा जांच के दायरे में हैं और 135 रद्द किए जा चुके हैं.

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