वक्फ संशोधन बिल पर घमासान, अब बजट सत्र में पेश होने की संभावना

वक्फ संपत्तियों के सुधार के लिए तैयार बिल पर सियासी घमासान जारी है. JPC की बैठकें विवादों और बहसों में फंसी हैं. अब यह बिल 2025 के बजट सत्र में पेश होने की उम्मीद है.

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वक्फ संशोधन विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य. (फोटो- पीटीआई) वक्फ संशोधन विधेयक पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य. (फोटो- पीटीआई)

ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 27 नवंबर 2024,
  • अपडेटेड 11:03 PM IST

वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और सुधार के लिए तैयार किया गया वक्फ संशोधन बिल अब संसद के 2025 के बजट सत्र में पेश किया जा सकता है. इस बिल को पहले मौजूदा संसद सत्र में लाने की योजना थी, लेकिन जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) की बैठकों में लगातार बढ़ते विवादों के चलते इसे टालना पड़ा है.  

JPC में क्यों हो रहा है विवाद?
  
वक्फ बिल की समीक्षा के लिए गठित JPC का कामकाज शुरू से ही सुचारू नहीं रहा. यहां हर बैठक में हंगामा और तीखी बहस हो रही है. बीजेपी और विपक्षी दलों के सदस्यों के बीच आए दिन गर्म बहस और आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं. स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि एक बैठक के दौरान बोतल फेंकने तक की घटना सामने आई. इन विवादों के कारण JPC के कई महत्वपूर्ण काम भी प्रभावित हुए हैं, जैसे राज्यों का दौरा करना और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना.  

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JPC का कार्यकाल बढ़ाने की योजना
  
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने JPC का कार्यकाल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. उनके अनुसार, समिति को अपनी रिपोर्ट संसद के बजट सत्र की पहली सप्ताह में सौंपनी चाहिए. JPC के अध्यक्ष जगदंबिका पाल इस प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास भेजेंगे. विपक्षी नेताओं, खासकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने JPC की कार्यशैली और बिल के प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं.  

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प्रधानमंत्री मोदी की टिप्पणी ने बढ़ाई बहस
  
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाराष्ट्र में एक चुनावी भाषण के दौरान वक्फ एक्ट पर तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि यह कानून कांग्रेस ने अपने वोट बैंक को ध्यान में रखकर बनाया था. पीएम मोदी ने कहा था, 'यह कानून संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की सोच के खिलाफ है. कांग्रेस ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति के लिए लागू किया था.' प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद विपक्ष और सरकार के बीच बहस और तेज हो गई है.  

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क्या है वक्फ बिल?
  
वक्फ एक धार्मिक संपत्ति होती है, जिसे समाज कल्याण या धार्मिक उद्देश्यों के लिए इस्लामिक कानून के तहत समर्पित किया जाता है. वर्तमान में भारत में राज्य और राष्ट्रीय वक्फ बोर्ड इन संपत्तियों का प्रबंधन करते हैं.  

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समस्याएं:  

  • कई जगह वक्फ संपत्तियों पर अतिक्रमण है.
  • प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी है.
  • भ्रष्टाचार और लापरवाही के कारण इन संपत्तियों का सही उपयोग नहीं हो रहा है. 

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प्रस्तावित सुधार
  
नए वक्फ संशोधन बिल में कई अहम बदलाव किए गए हैं:  
1. केंद्रीय निगरानी: एक सेंट्रल वक्फ काउंसिल का गठन होगा, जो राज्यों के वक्फ बोर्डों की निगरानी करेगा.  
2. पारदर्शिता: वक्फ संपत्तियों का ऑडिट और उनकी सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी.  
3. संपत्तियों की सुरक्षा: अतिक्रमण हटाने के लिए नए उपाय किए जाएंगे और इन संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा.  
4. कानूनी मजबूती: वक्फ विवादों को सुलझाने के लिए ट्रिब्यूनल को अधिक अधिकार दिए जाएंगे.  

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विपक्ष की चिंता और चुनौतियां
  
विपक्ष इस बिल को लेकर काफी आलोचनात्मक है. AIMIM प्रमुख ओवैसी ने इसे "अनावश्यक और भ्रामक" करार दिया. उनका कहना है कि JPC की बैठकें केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का अखाड़ा बन चुकी हैं.  

सरकार के लिए राह आसान नहीं

वक्फ संपत्तियों का सही प्रबंधन और सुधार लाखों करोड़ की संपत्तियों को जनकल्याण में बदल सकता है. इस राह में फायदा और चुनौती दोनों हैं. जैसे कि इन संपत्तियों का उपयोग शिक्षा, सामाजिक कल्याण और स्वास्थ्य सेवाओं में हो सकता है, लेकिन संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों पर राय बंटी हुई है. सरकार को विपक्ष और जनता के विश्वास को जीतने के लिए गहराई से काम करना होगा.

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