इंग्लैंड नहीं छोड़ सकता, भारत कब लौटूंगा नहीं बता सकता, विजय माल्या ने भेजा बयान

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि माल्या ने कोर्ट के विशेष संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का सहारा लिया है, जो न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांत पर आधारित है. मेहता ने कहा कि कानून का पालन न करने वाला व्यक्ति इस अदालत से विशेष राहत की उम्मीद नहीं कर सकता.

Advertisement
FEO एक्ट पर सुनवाई से पहले माल्या की सफाई, इंग्लैंड छोड़ने पर रोक FEO एक्ट पर सुनवाई से पहले माल्या की सफाई, इंग्लैंड छोड़ने पर रोक

विद्या

  • मुंबई,
  • 18 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:29 PM IST

भगोड़े कारोबारी विजय माल्या ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया है कि वह इंग्लैंड नहीं छोड़ सकता. माल्या ने कोर्ट में दायर बयान में कहा कि इंग्लैंड की अदालतों के आदेश के मुताबिक वह इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने या किसी अंतरराष्ट्रीय ट्रैवल डॉक्युमेंट के लिए आवेदन करने या उसे अपने पास रखने की अनुमति नहीं रखते. इसलिए वह यह भी साफ तौर पर नहीं बता सकते कि भारत कब लौट पाएंगे.

Advertisement

माल्या ने यह जवाब तब दिया जब हाईकोर्ट ने उनसे पूछा था कि अगर वह चाहते हैं कि उनकी याचिका पर सुनवाई हो तो वो हलफनामे के जरिए बताएं कि वह भारत कब लौटेंगे.

चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम ए अखंड की बेंच ने बुधवार को कहा कि माल्या सिर्फ बयान नहीं, बल्कि बाकायदा शपथपत्र (एफिडेविट) दाखिल करें. कोर्ट ने कहा कि हमने याचिकाकर्ता को पर्याप्त समय दिया है, लेकिन अभी तक हलफनामा दाखिल नहीं किया गया है. दरअसल, माल्या ने 2019 में फ्यूग‍िट‍िव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी.

सरकार का क्या कहना है?

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि माल्या ने कोर्ट के विशेष संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का सहारा लिया है, जो न्याय और निष्पक्षता के सिद्धांत पर आधारित है.

Advertisement

मेहता ने कहा कि कानून का पालन न करने वाला व्यक्ति इस अदालत से विशेष राहत की उम्मीद नहीं कर सकता. सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह और अन्य वकीलों ने भी यही रुख अपनाया.

2016 से फरार, 2019 में घोषित 'फ्यूजिटिव'

माल्या पर आरोप है कि वह 2 मार्च 2016 से फरार हैं. पांच जनवरी 2019 को उन्हें अदालत ने 'फ्यूजिटिव ऑफेंडर' घोषित किया था. इसके बाद उनके प्रत्यर्पण (एक्स्ट्राडिशन) की प्रक्रिया शुरू हुई.

सरकार का कहना है कि माल्या अपने बयान में यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह हमेशा भारत लौटना चाहते थे, लेकिन यह मुद्दा तब मायने नहीं रखता जब अदालत यह देख रही है कि FEO एक्ट वैध है या नहीं. मेहता ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता भारत लौटते हैं या उनका प्रत्यर्पण होता है तो उनके साथ भारतीय संविधान और कानून के मुताबिक ही कार्रवाई होगी. भारत की न्याय व्यवस्था मजबूत और स्वतंत्र है. इसलिए उन्हें कानून की प्रक्रिया का सामना करना चाहिए.

माल्या की तरफ से क्या दलील?

माल्या की ओर से पेश वकील अमित देसाई ने कहा कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इंग्लैंड की अदालत के आदेश के कारण वह देश नहीं छोड़ सकते. उनका पासपोर्ट भी रद्द कर दिया गया है. इस पर मेहता ने जवाब दिया कि अगर माल्या भारत लौटना चाहते हैं तो उन्हें ट्रैवल डॉक्युमेंट दिया जा सकता है.

Advertisement

देसाई ने यह भी कहा कि सरकार ने माल्या की सारी संपत्तियां जब्त कर ली हैं और वे अब डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल या PMLA के तहत हैं. इस पर मेहता ने टिप्पणी की कि अगर आप देश छोड़कर भागते हैं तो कानून अपना काम करेगा.

अगली तारीख

हाईकोर्ट ने माल्या को 11 मार्च तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. अब देखना होगा कि माल्या कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए भारत लौटने की कोई स्पष्ट समय-सीमा बताते हैं या नहीं.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement