पहली बार लोकसभा में गूंजा पूरा 'वंदे मातरम्', राष्ट्रगीत के साथ शुरू हुई कार्यवाही

लोकसभा में गुरुवार को मॉनसून सत्र के आखिरी दिन की शुरुआत 'वंदे मातरम्' के साथ हुई. यह कदम एक नया कानून बनने के कुछ दिनों बाद उठाया गया, जिसमें राष्ट्रीय गीत को कानूनी सुरक्षा दी गई और इसे आधिकारिक तौर पर गाने के लिए नियम तय किए गए.

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गुरुवार को संसद के मॉनसून सत्र का अंतिम दिन था. (Photo: ITG) गुरुवार को संसद के मॉनसून सत्र का अंतिम दिन था. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही पहली बार पूरे 'वंदे मातरम्' के साथ शुरू हुई. जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और सभी सांसद मौजूद रहे.

राष्ट्रगीत के छह स्टैंजा बजाए जाने के बाद, लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई और सत्र समाप्त हो गया.

यह कदम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से वंदे मातरम् को कानूनी सुरक्षा देने वाले कानून को मंजूरी देने के कुछ दिनों बाद सामने आया है.

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यह कानून राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने को दंडनीय अपराध बनाता है, और इसे राष्ट्रगान के समान ही कानूनी दर्जा देता है. सरकार ने पहले ही आधिकारिक कार्यक्रमों में इसके गायन से जुड़े नियम जारी किए थे.

28 जनवरी के एक आदेश में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि राष्ट्रपति के आगमन, तिरंगा फहराने और राज्यपालों के संबोधन जैसे मौकों पर गीत के छह स्टैंजा गाए जाएं.

यह भी पढ़ें: ड्राइविंग सीखते वक्त खोया कंट्रोल, तालाब में गिरी कार, महिला की मौत

इस बीच सरकार और विपक्ष के बीच बार-बार हुए हंगामे और तीखी बहस के बाद लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई.

बता दें, गुरुवार को संसद के मॉनसून सत्र का अंतिम दिन था. हंगामे के बीच लोकसभा के बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुई. गुरुवार को संसद परिसर में सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों की ओर से जोरदार विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला.

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'शुद्धीकरण' के मुद्दे पर भड़के खड़गे

राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मैं अपने एससी होने को मुद्दा नहीं बनाता, शुद्धीकरण करके मेरा अपमान किया गया.

खड़गे ने कहा, 'बड़े दुःख के साथ कहना पड़ता है मैं हल्द्वानी में पब्लिक स्पीच में रामलीला मैदान में भाषण दिया. लाखों लोग वहां पर थे. उस वक्त मैंने किसी समाज का किसी धर्म का नाम नहीं लिया सिर्फ मैं लोगों के समस्याओं को वहां पर बताया, लेकिन मेरे स्पीच होने के बाद कल उन लोगों ने हवन करके उस स्टेज का शुद्धीकरण का काम किया.'

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