PM मोदी-शाह के कार्यक्रम में लगीं 554 बसें, उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संघ ने बकाया 2.8 करोड़ के लिए लिखी चिट्ठी

उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने देहरादून के जिलाधिकारी से मांग की है कि 7 मार्च 2026 के कार्यक्रम और 14 अप्रैल 2026 के प्रधानमंत्री दौरे के लिए लगाई गई 554 बसों का 2 करोड़ 82 लाख रुपये का लंबित भुगतान तुरंत जारी किया जाए.

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उत्तराखंड रोडवेज ने कई चिट्ठियां लिखी हैं. (Photo- Social Media) उत्तराखंड रोडवेज ने कई चिट्ठियां लिखी हैं. (Photo- Social Media)

अंकित शर्मा

  • देहरादून,
  • 05 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:23 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रमों के लिए लगाई गई उत्तराखंड परिवहन निगम की 554 बसों का भुगतान अब तक अटका हुआ है. उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने देहरादून के जिलाधिकारी को चिट्ठी भेजकर कहा है कि कुल 2 करोड़ 82 लाख 20 हजार 891 रुपये का लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाए. परिषद का कहना है कि पहले से आर्थिक संकट झेल रहे निगम पर इससे और दबाव बढ़ गया है.

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मामला सिर्फ लंबित बिल का नहीं है. परिषद ने अपनी चिट्ठी में कहा है कि कर्मचारियों को अप्रैल 2025 से नियमित वेतन नहीं मिल रहा है, जबकि रिटायर्ड कर्मचारियों का भुगतान सितंबर 2025 से लंबित है. परिषद का कहना है कि डीजल, स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा के संचालन खर्च के बीच इस देरी ने मुश्किल और बढ़ा दी है. जिलाधिकारी कार्यालय ने इस मामले में शासन को भी चिट्ठी लिखा, लेकिन प्रोटोकॉल विभाग ने नियमावली का हवाला देकर इस भुगतान से इनकार कर दिया.

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299 बसों का बिल अलग, 255 बसों का भुगतान भी बाकी

परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष मुकेश नैथानी की तरफ से 16 जून 2026 को भेजी गई चिट्ठी के मुताबिक, 7 मार्च 2026 को जन-जन की सरकार, 4 साल बेमिसाल कार्यक्रम में लाभार्थियों के आवागमन के लिए परिवहन निगम की 299 बसें लगाई गई थीं. इन बसों के एवज में 1 करोड़ 44 लाख 2 हजार 431 रुपये का भुगतान लंबित बताया गया है. इसी तरह 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री के उत्तराखंड दौरे के लिए विभिन्न डिपो से 255 बसें उपलब्ध कराई गई थीं. इन बसों के संचालन के बदले 1 करोड़ 38 लाख 18 हजार 460 रुपये का भुगतान भी अभी तक नहीं हुआ है.

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परिषद का दावा है कि इस संबंध में संबंधित विभागों को बिल पहले ही भेजे जा चुके हैं और मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय से भी जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. इसके बावजूद भुगतान नहीं हुआ. परिषद ने जिलाधिकारी से कहा है कि लंबित राशि को प्राथमिकता के आधार पर जारी कराया जाए, ताकि कर्मचारियों के वेतन, सेवानिवृत्ति देयकों और निगम के दैनिक संचालन पर पड़ रहे असर को कम किया जा सके.

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जिलाधिकारी ने लिखा पत्र, प्रोटोकॉल विभाग ने नियमों का हवाला दिया

देहरादून कलेक्ट्रेट के प्रोटोकॉल अनुभाग ने भी शासन के प्रोटोकॉल विभाग को चिट्टी लिखकर बताया कि 7 मार्च के कार्यक्रम में लगी 299 बसों का 1.44 करोड़ रुपये और 14 अप्रैल के प्रस्तावित प्रधानमंत्री दौरे के लिए लगी 255 बसों का 1.38 करोड़ रुपये भुगतान लंबित है. इसके बाद 7 जुलाई को प्रोटोकॉल विभाग से जिलाधिकारी को भेजे गए जवाब में अनुसचिव ने साफ लिखा कि उत्तराखंड राज्य अतिथि नियमावली, संशोधित 2024 में इस तरह के भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है. इसी आधार पर प्रस्ताव की मूल प्रति जिलाधिकारी कार्यालय को वापस भेज दी गई.

आजतक से फोन पर बातचीत में सचिव प्रोटोकॉल विनोद कुमार सुमन ने कहा कि नियमावली में सिर्फ वीआईपी गाड़ी, रहने और खाने के भुगतान का प्रावधान है. इस पूरे पत्राचार से इतना जरूर साफ है कि भुगतान अब भी अटका हुआ है, जबकि रोडवेज कर्मचारी और सेवानिवृत्त कर्मचारी अपने बकाये का इंतजार कर रहे हैं. अब परिषद की मांग है कि 2 करोड़ 82 लाख का यह भुगतान जल्द जारी हो, ताकि निगम पर बढ़ रहा वित्तीय दबाव कुछ कम हो सके.

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