UPI पर MDR चार्ज के सपोर्ट में थे चिदंबरम समेत 5 कांग्रेस सांसद, हंगामे के बीच BJP का दावा

2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर शुल्क लगाने के फैसले को लेकर राहुल गांधी की आलोचना पर सरकारी सूत्रों और बीजेपी ने पलटवार किया है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने चरणबद्ध MDR व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की थी और समिति की बैठक में मौजूद कांग्रेस सांसदों ने इसका विरोध नहीं किया था.

Advertisement
UPI पर MDR चार्ज को लेकर BJP का बड़ा दावा (Photo: ITG) UPI पर MDR चार्ज को लेकर BJP का बड़ा दावा (Photo: ITG)

हिमांशु मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 6:58 AM IST

यूपीआई के 2,000 रुपये से ज्यादा के लेनदेन पर शुल्क को लेकर केंद्र सरकार और कांग्रेस के बीच विवाद बढ़ गया है. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए इसे 'UPI टैक्स' बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिका के दबाव में काम करने का आरोप लगाया है. वहीं अब इसके जवाब में सरकारी सूत्रों और बीजेपी ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. 

Advertisement

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वित्त मामलों की स्थायी समिति ने UPI के लिए स्तरीय मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR और आय का ढांचा तैयार करने पर जोर दिया था. समिति ने यह भी कहा था कि इस व्यवस्था को बिना देरी अधिसूचित कर लागू किया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: UPI पेमेंट पर फीस का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, फैसला वापस लेने की मांग

एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने बुधवार को सवाल उठाया कि अगर समिति ने UPI के लिए टिकाऊ आय व्यवस्था की जरूरत बताई थी तो राहुल गांधी अब इसका विरोध क्यों कर रहे हैं. अधिकारी के मुताबिक, 12 अगस्त को जब समिति की रिपोर्ट को अपनाया गया, उस समय कांग्रेस के पांच सांसद- पी. चिदंबरम, मनीष तिवारी, गौरव गोगोई, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ मौजूद थे. समिति की बैठक में मौजूद कांग्रेस के वरिष्ठ सांसदों ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी.

Advertisement

हालांकि अभी तक सरकारी सूत्रों के इन दावों पर कांग्रेस की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

समिति ने MDR को लेकर क्या कहा था?

सूत्र के मुताबिक वित्त संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में कहा गया कि UPI के लिए टिकाऊ आय मॉडल जरूरी है. समिति ने यह भी कहा कि अधिक मूल्य वाले लेनदेन पर अलग-अलग स्तर के MDR की व्यवस्था के लिए कानूनी प्रावधान किए गए हैं और इस व्यवस्था को जल्द अधिसूचित कर लागू किया जाना चाहिए.

रिपोर्ट में सरकार की ओर से UPI के शून्य-MDR मॉडल को बनाए रखने के लिए दिए जा रहे प्रोत्साहन पर भी चिंता जताई गई. समिति के मुताबिक, 2026-27 के लिए करीब 2,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है, जबकि उद्योग की अनुमानित परिचालन लागत करीब 20,700 करोड़ रुपये है.

समिति ने कहा कि इस अंतर के कारण भुगतान सेवा देने वाली कंपनियां सरकारी सहायता पर ज्यादा निर्भर रहती हैं. उसके मुताबिक, इसका असर साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और भुगतान नेटवर्क के बुनियादी ढांचे में होने वाले निवेश पर पड़ सकता है.

Advertisement

समिति ने आत्मनिर्भर आय मॉडल की बात कही थी

रिपोर्ट में कहा गया कि छोटे कारोबारियों और कम मूल्य वाले UPI लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रोत्साहन योजना जरूरी है. खास तौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान को बढ़ाने के लिए ऐसी योजनाओं की जरूरत बताई गई.

इसके साथ ही समिति ने वित्तीय सेवा विभाग से एक ऐसा स्तरीय आय मॉडल तलाशने को कहा था, जिससे UPI व्यवस्था लंबे समय में सरकारी खजाने पर लगातार निर्भर न रहे. समिति ने UPI के लिए वित्तीय रूप से टिकाऊ व्यवस्था को जरूरी बताया था.

यह भी पढ़ें: 'कोई विदेशी दबाव नहीं...', UPI चार्ज पर विपक्ष के आरोपों पर केंद्र सरकार का जवाब

अब क्या है सरकार का नया UPI शुल्क स्ट्रक्चर?

नए स्ट्रक्चर के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से ज्यादा के पात्र कारोबारी UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा. यह शुल्क ग्राहक के बजाय व्यापारी से लिया जाएगा. 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के लेनदेन पर इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है. व्यक्ति से व्यक्ति होने वाले UPI लेनदेन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा.

छोटे कारोबारियों के लिए भी राहत का प्रावधान है. UPI क्यूआर के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारियों को इस MDR से बाहर रखा गया है. कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग दर तय की गई है.

Advertisement

सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाएगा. भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क ढांचे में निवेश बनाए रखने के लिए नई व्यवस्था की जरूरत बताई गई है.

यह भी पढ़ें: 'मोदी जी UPI टैक्स वापस लीजिए...', ट्रंप का नाम लेकर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने क्या कहा था?

बता दें कि राहुल गांधी ने नए शुल्क ढांचे की आलोचना करते हुए इसे 'UPI टैक्स' बताया है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस कदम का फायदा अमेरिका को मिलेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में झुक रहे हैं. राहुल गांधी ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है.

हालांकि सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है. उसका कहना है कि यह शुल्क ग्राहक पर नहीं लगाया गया है और नीति का उद्देश्य UPI व्यवस्था के लिए लंबे समय तक टिकाऊ वित्तीय ढांचा तैयार करना है. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »