तमिलनाडु में परंदूर एयरपोर्ट परियोजना को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. डीएमके नेता और उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने परियोजना रद्द करने के फैसले पर सरकार की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने मौजूदा सरकार को ‘सोफा मॉडल’ सरकार बताते हुए कहा कि चेन्नई के विकास के लिए जरूरी इस प्रोजेक्ट को रोकना सही फैसला नहीं है.
उन्होंने दावा किया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी AAI, मिनिस्ट्री ऑफ सिविस एविएशन और दूसरी संबंधित एजेंसियां इस परियोजना को लेकर अध्ययन कर चुकी हैं और जरूरी मंजूरियां भी दी जा चुकी हैं. स्टालिन के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण, मुआवजा, पुनर्वास और दूसरी जरूरी प्रक्रियाओं पर सरकार पहले ही काफी काम कर चुकी है.
उदयनिधि ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के दौरान प्रभावित लोगों को बाजार मूल्य से तीन गुना तक मुआवजा देने की व्यवस्था की गई थी. इसके अलावा इन कामों पर सरकारी धन भी खर्च किया गया. ऐसे में अब परियोजना को रोकने से सरकार को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है. उन्होंने सरकार के फैसले को ‘छोटी राजनीतिक वजहों’ से लिया गया फैसला बताते हुए कहा कि इसका असर सिर्फ एयरपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा.
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उनके मुताबिक, अगर चेन्नई में आधुनिक एयर कनेक्टिविटी नहीं बढ़ी तो शहर के आसपास निवेश करने वाली कंपनियां दूसरे राज्यों का रुख कर सकती हैं. वहीं, नई कंपनियां भी चेन्नई में निवेश करने से पीछे हट सकती हैं. उदयनिधि ने कहा कि परंदूर एयरपोर्ट तमिलनाडु के भविष्य से जुड़ा प्रोजेक्ट है और राज्य के युवाओं, रोजगार और इंडस्ट्रियल विकास को ध्यान में रखते हुए सरकार को परियोजना जारी रखने के लिए कदम उठाने चाहिए.
प्रमोद माधव