ट्रेनी IPS की पहली पोस्टिंग में ही 1 करोड़ का रिश्वत कांड, CBI कोर्ट ने DGP से मांगी Action Taken Report

दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत में ट्रेनी IPS राहुल बंसल से जुड़े 1 करोड़ रिश्वत मामले की सुनवाई हुई. आरोप है कि सरगुजा में CSP रहते साइबर फ्रॉड केस को रफा-दफा करने के लिए हवाला के जरिए रकम ली गई. अदालत ने छत्तीसगढ़ के DGP और CBI निदेशक से Action Taken Report मांगी है. मामले में दो अन्य पुलिसकर्मी भी आरोपी हैं.

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ट्रेनी आईपीएस के मामले में कोर्ट ने नोटिस जारी किया है (Photo: instagram@rahulbansal.27) ट्रेनी आईपीएस के मामले में कोर्ट ने नोटिस जारी किया है (Photo: instagram@rahulbansal.27)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली ,
  • 11 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:48 PM IST

दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष CBI अदालत ने छत्तीसगढ़ कैडर के ट्रेनी IPS अधिकारी और पूर्व में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर रहे राहुल बंसल को नोटिस जारी किया है.. 2022 बैच के ट्रेनी IPS राहुल बंसल पर आरोप है कि सरगुजा जिले में CSP के तौर पर अपनी पहली फील्ड पोस्टिंग के दौरान उन्होंने एक साइबर फ्रॉड केस को कथित तौर पर रफा-दफा करने के लिए 1 करोड़ रुपये की रिश्वत ली.

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मामला सामने आने के बाद दिल्ली की विशेष CBI अदालत ने इसे गंभीरता से लिया है. अदालत ने छत्तीसगढ़ के DGP और CBI निदेशक से Action Taken Report (ATR)  तलब की है. इस मामले में राहुल बंसल के अलावा सरगुजा साइबर थाने में तैनात रहे ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा भी आरोपी बनाए गए हैं. शिकायतकर्ता की ओर से अदालत के सामने कथित लेन-देन से जुड़े डिजिटल साक्ष्य भी पेश किए गए हैं. इनमें WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग शामिल होने का दावा किया गया है.

राहुल बंसल 2022 बैच के IPS अधिकारी बताए गए हैं. इससे पहले वह आयकर विभाग में इंस्पेक्टर के तौर पर काम कर चुके थे. IPS बनने के बाद उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में CSP के तौर पर हुई. इसी दौरान एक साइबर फ्रॉड मामले को लेकर उन पर गंभीर आरोप लगाए गए. शिकायत के मुताबिक, साइबर फ्रॉड से जुड़े मामले को कथित तौर पर खत्म करने या रफा-दफा करने के एवज में 1 करोड़ रुपये की रकम मांगी और ली गई. आरोप है कि यह रकम हवाला के जरिए मई 2026 में दो अलग-अलग किस्तों में ट्रांसफर की गई. बताया गया है कि दोनों किस्तें 50-50 लाख रुपये की थीं. 

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शिकायत में दावा किया गया है कि कथित तौर पर 1 करोड़ रुपये की रकम एक साथ नहीं बल्कि दो हिस्सों में दी गई. आरोप के मुताबिक, मई 2026 में 50 लाख रुपये की पहली किस्त और 50 लाख रुपये की दूसरी किस्त हवाला के माध्यम से ट्रांसफर की गई. शिकायतकर्ता ने इस कथित लेन-देन से जुड़े कई पहलुओं को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है. मामले में डिजिटल कम्युनिकेशन को भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. अदालत के सामने पेश किए गए कथित सबूतों में WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग का जिक्र है. अब इन डिजिटल साक्ष्यों की जांच और उनकी प्रमाणिकता भी मामले में अहम भूमिका निभा सकती है.

सिर्फ ट्रेनी IPS ही नहीं, दो पुलिसकर्मी भी आरोपी

इस मामले में राहुल बंसल अकेले आरोपी नहीं हैं. सरगुजा के साइबर थाने में तैनात रहे दो पुलिसकर्मियों के नाम भी शिकायत में सामने आए हैं. इनमें ASI प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा शामिल हैं. शिकायतकर्ता का आरोप है कि साइबर फ्रॉड के मामले को लेकर हुई कथित पूरी गतिविधि में इन पुलिसकर्मियों की भी भूमिका थी. इसी आधार पर उन्हें भी मामले में सह-आरोपी बनाया गया है. अब जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि कथित रकम का लेन-देन किस तरह हुआ, इसमें किसकी क्या भूमिका थी और शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पेश डिजिटल साक्ष्यों की वास्तविकता क्या है.

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CBI कोर्ट ने मांगी Action Taken Report

मामले में सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम दिल्ली की विशेष CBI अदालत में हुआ. राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की स्थिति की रिपोर्ट मांगी है. विशेष CBI अदालत के जज सुधांशु कौशिक ने छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक और CBI निदेशक से Action Taken Report यानी ATR तलब की है. ATR के जरिए अदालत यह जानना चाहती है कि शिकायत और लगाए गए आरोपों के संबंध में अब तक क्या कार्रवाई की गई है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, इस पर भी तस्वीर और साफ हो सकती है.

BNSS की धारा 175(3) के तहत पहुंचा मामला

राहुल बंसल और अन्य के खिलाफ शिकायतकर्ता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 175(3) के तहत विशेष CBI अदालत का रुख किया है. यह कानूनी प्रक्रिया उस स्थिति में महत्वपूर्ण होती है, जब शिकायतकर्ता पुलिस से कार्रवाई की मांग के बाद अदालत के माध्यम से जांच या FIR जैसी कार्रवाई के लिए निर्देश चाहता है. इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और पेश किए गए कथित डिजिटल सबूतों के आधार पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों से Action Taken Report मांगी है.

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क्या है पूरा मामला?

शिकायत के मुताबिक, मामला एक साइबर फ्रॉड केस से जुड़ा है. आरोप है कि इस केस को कथित तौर पर रफा-दफा करने के लिए 1 करोड़ रुपये की रकम मांगी गई. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह रकम मई 2026 में दो किस्तों में हवाला के जरिए ट्रांसफर की गई. इसके बाद मामले में ट्रेनी IPS राहुल बंसल समेत दो अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर शिकायत की गई. शिकायतकर्ता ने डिजिटल कम्युनिकेशन से जुड़े कथित साक्ष्य भी उपलब्ध कराए. मामला अब दिल्ली की विशेष CBI अदालत तक पहुंच चुका है.

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