केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम नगर निगम में शुक्रवार को उस समय हंगामा हो गया, जब केएएपीए (केरल एंटी सोशल एक्टिविटीज प्रिवेंशन एक्ट) के तहत विय्यूर जेल में बंद भाजपा पार्षद आर. सुगथन की छह महीने की छुट्टी का प्रस्ताव परिषद में मंजूर कर लिया गया. इस फैसले का यूडीएफ और एलडीएफ ने जोरदार विरोध किया और इसे अवैध तथा अनडेमोक्रेटिक बताया.
वाझोट्टुकोनम वार्ड के पार्षद आर. सुगथन की छुट्टी की अर्जी भाजपा पार्षदों और निर्दलीय पार्षद सुधीश के समर्थन से पारित हुई.101 सदस्यीय परिषद में प्रस्ताव को 51 सदस्यों का समर्थन मिला. इसके बाद महापौर वी.वी. राजेश ने अपने कास्टिंग वोट का इस्तेमाल करते हुए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी.
फैसले के विरोध में यूडीएफ और एलडीएफ के पार्षदों ने परिषद भवन के भीतर नारेबाजी की और महापौर की कुर्सी के सामने खड़े होकर प्रदर्शन किया. विपक्ष का आरोप था कि भाजपा केएएपीए के तहत जेल में बंद एक पार्षद को बचाने की कोशिश कर रही है.
विपक्ष ने फैसले का किया विरोध
बैठक के दौरान यूडीएफ नेता के.एस. सबरीनाधन ने महापौर से पूछा कि केरल नगरपालिका अधिनियम के किस प्रावधान के तहत हिरासत में बंद किसी पार्षद को अवकाश दिया जा सकता है. वहीं, एलडीएफ संसदीय दल के नेता एस.पी. दीपक ने आरोप लगाया कि यह फैसला अवैध और लोकतंत्र के खिलाफ है तथा विपक्ष इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ेगा.
बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में महापौर वी.वी. राजेश ने कहा कि सुगथन ने नियमों के तहत अवकाश का आवेदन दिया था और परिषद ने केरल नगरपालिका अधिनियम के अनुसार उसे मंजूरी दी है. उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि की सदस्यता की रक्षा करना महापौर की जिम्मेदारी है, इसलिए उन्होंने कास्टिंग वोट का इस्तेमाल किया.
महापौर ने क्या कहा
महापौर ने बताया कि राज्य गृह विभाग के एक परिपत्र के अनुसार, यदि कोई पार्षद जेल में रहते हुए अवकाश का आवेदन देता है और परिषद उसे मंजूर कर लेती है, तो उसकी सदस्यता सुरक्षित रह सकती है. सुगथन ने अपना आवेदन विय्यूर जेल अधीक्षक को सौंपा था, जिसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत डाक से नगर निगम भेजा गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, यदि सुगथन शुक्रवार की बैठक से बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित रहते, तो उनकी सदस्यता समाप्त हो सकती थी. कई आपराधिक मामलों के आरोपी सुगथन को पिछले महीने केएएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था. मंदिर उत्सव से जुड़े एक कथित हमले के मामले में केरल हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद पुलिस ने उन्हें उनके घर से गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हवा में गोलियां भी चलानी पड़ी थीं. 2025 के स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा 101 सदस्यीय तिरुवनंतपुरम नगर निगम में 50 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी.
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