रेप केस में दोषी ठहराए गए तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल की अपील को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई. गोवा सरकार ने शीर्ष अदालत में दलील दी कि हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली अपील दाखिल करने से पहले तेजपाल को सरेंडर करना चाहिए था. वहीं तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि नियम अपील दाखिल करने से पहले सरेंडर करना अनिवार्य नहीं बनाते हैं.
तेजपाल की अपील सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आलोक अराधे की सिंगल जज बेंच के सामने चैंबर लिस्ट में लगी थी. चैंबर में आम तौर पर किसी मामले को नियमित बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने से पहले उससे जुड़े शुरुआती और प्रक्रियात्मक मुद्दों पर विचार किया जाता है.
सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से तेजपाल की अपील की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाया गया. राज्य सरकार ने कहा कि रेप मामले में दोषसिद्धि के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से पहले तेजपाल को सरेंडर करना चाहिए था.
सिब्बल बोले- सरेंडर की समयसीमा अभी खत्म नहीं हुई
तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने गोवा सरकार की दलील का विरोध किया. सिब्बल ने कहा कि संबंधित नियमों में ऐसा कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है, जिसके तहत तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल करने से पहले ही सरेंडर करना जरूरी हो. सिब्बल ने इस बात पर भी जोर दिया कि हाईकोर्ट ने तेजपाल को सरेंडर करने के लिए सितंबर के पहले हफ्ते तक का समय दिया है.
ऐसे में जब हाईकोर्ट की ओर से दी गई समयसीमा अभी समाप्त नहीं हुई है, तो यह नहीं कहा जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट में अपील करने से पहले उन्हें सरेंडर करना ही होगा.
तेजपाल की तरफ से यह भी मांग की गई कि उनकी अपील को 31 अगस्त तक सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए. सिब्बल ने अदालत को बताया कि अपील में हाईकोर्ट के फैसले के अमल पर रोक लगाने की मांग की गई है. इसके साथ ही तेजपाल ने सरेंडर करने के निर्देश पर भी रोक लगाने की गुहार लगाई है.
सुप्रीम कोर्ट तय करेगा शुरुआती प्रक्रियात्मक सवाल
इस मामले में फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह है कि क्या तेजपाल को अपनी अपील पर सुनवाई से पहले सरेंडर करना आवश्यक है या हाईकोर्ट की ओर से दी गई समयसीमा तक वह ऐसा करने से बच सकते हैं.
जस्टिस आलोक अराधे ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अदालत इस प्रारंभिक प्रक्रियात्मक मुद्दे पर आदेश पारित करेगी. इसके बाद ही तेजपाल की अपील को नियमित सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किए जाने की आगे की प्रक्रिया स्पष्ट होने की संभावना है.
तेजपाल ने रेप मामले में अपनी दोषसिद्धि को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. इसके साथ ही उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले और सरेंडर के निर्देश पर अंतरिम रोक की मांग की है. अब शीर्ष अदालत के शुरुआती आदेश पर यह निर्भर करेगा कि उनकी मुख्य अपील पर आगे कब और किस तरह सुनवाई होती है.
अनीषा माथुर