तमिलनाडु के तूतीकोरिन (थूथुकुडी) में नमक मजदूरों का गुस्सा सड़कों पर उतर आया. सुबह करीब साढ़े छह बजे मुल्लाकाडु और कोवलम तट पर मजदूर काले झंडे लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे. उनकी नाराजगी नमक बनाने वाली पारंपरिक जमीनों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देने की कोशिश को लेकर है.
मामला सिर्फ जमीन का नहीं, रोजी-रोटी का भी है. इन इलाकों में कई परिवार पीढ़ियों से नमक उत्पादन से जुड़े हैं. अब इसी जगह शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट लगाने की योजना है, जिससे मजदूरों को अपना काम प्रभावित होने की चिंता है. इसे लेकर स्थानीय मछुआरे भी विरोध में उतर आए हैं. उन्हें आशंका है कि शिपबिल्डिंग यार्ड से समुद्र में प्रदूषण बढ़ सकता है. इसी वजह से बड़ी संख्या में नमक उत्पादक, मजदूर और स्थानीय लोग प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन करने पहुंचे.
जमीन पर शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट का विरोध
मुल्लाकाडु इलाके में जिन जमीनों पर नमक बनाया जाता है, उनमें सरकारी जमीन भी शामिल है. इन जमीनों को पट्टे पर लेकर नमक उत्पादन किया जाता है. अब इन्हीं जमीनों को प्रस्तावित शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए इस्तेमाल करने की योजना है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट SIPCOT और केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के संयुक्त उपक्रम के जरिए विकसित किया जाना प्रस्तावित है. नमक उत्पादकों का कहना है कि नमक के खेत हटाकर उद्योग लगाने से वर्षों से इस काम पर निर्भर लोगों की मुश्किल बढ़ जाएगी.
प्रशासन ने प्रोजेक्ट से प्रभावित नमक उत्पादकों के लिए वैकल्पिक जमीन देने की योजना रखी है. मुआवजे की बात भी सामने आई है. प्रदर्शनकारी इससे संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि नमक उत्पादन के लिए समुद्र से जुड़ी परिस्थितियां जरूरी होती हैं. इसी वजह से उन्होंने शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट के लिए वैप्पार इलाके को विकल्प के तौर पर देखने की मांग की है.
मछुआरों को समुद्र की चिंता
शिपबिल्डिंग यार्ड को लेकर मछुआरों की भी अपनी चिंता है. उनका कहना है कि इससे समुद्र में प्रदूषण बढ़ सकता है. इसका असर मछली पकड़ने के काम पर पड़ने की आशंका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास की योजना बनाते समय उन लोगों की रोजी-रोटी का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, जो वर्षों से इस इलाके पर निर्भर हैं. उन्होंने प्रशासन से अपनी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन आगे बड़ा रूप ले सकता है. उनका विरोध शिपबिल्डिंग प्रोजेक्ट के साथ-साथ नमक उत्पादन वाली जमीनों को दूसरी जगह देने की योजना को लेकर भी है.
फिलहाल नमक मजदूरों और मछुआरों की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है. उनका साफ कहना है कि जिस जमीन से पीढ़ियों से रोजगार मिलता आया है, उसके भविष्य का फैसला स्थानीय लोगों की चिंता को नजरअंदाज करके नहीं होना चाहिए.
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