जंतर-मंतर पर हुई मारपीट के मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा. स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ POCSO समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज है. स्वतंत्र ने गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती दी है. इसके लिए वकील उमेश शर्मा ने बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दाखिल की है. वकील ने चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच के सामने मामले का जिक्र किया. इस पर कोर्ट ने सोमवार को ही याचिका पर सुनवाई की मंजूरी दे दी.
बंदी प्रत्यक्षीकरण को हेबियस कॉर्पस भी कहा जाता है. यह याचिका तब लगाई जाती है, जब किसी व्यक्ति को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखने का आरोप हो. इसमें अदालत से हिरासत की कानूनी स्थिति की जांच करने की मांग की जाती है. अब सोमवार को हाई कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा.
बुलंदशहर से हुई थी गिरफ्तारी
स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से 5 सितबंर को गिरफ्तार किया था. इसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया. वहां से स्वतंत्र को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), POCSO और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज है. मामले में नाबालिग से जुड़े यौन उत्पीड़न, पीछा करने, धमकाने और महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे आरोप हैं.
इस मामले ने तब तूल पकड़ा, जब नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद नाबालिग पीड़िता को लेकर संसद मार्ग थाने पहुंचे थे. इसके बाद नाबालिग के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी.
जंतर-मंतर पर मारपीट और कथित वीडियो से बढ़ा विवाद
पूरे विवाद की शुरुआत दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान हुई मारपीट से हुई थी. इस घटना में संजय आजाद पर हमले का आरोप लगा था. बाद में इंटरनेट पर एक कथित वीडियो सामने आया, जिसमें स्वतंत्र भारद्वाज मारपीट करने जैसी बातें कहते सुने गए. वीडियो सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया. दूसरी तरफ चिराग पासवान ने भी कहा था कि स्वतंत्र ने उनके नाम का गलत इस्तेमाल किया है. उन्होंने इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाने की बात कही थी.
अब स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा. इस सुनवाई में अदालत का रुख क्या रहता है, इस पर सबकी नजर है.
संजय शर्मा / अनीषा माथुर