राजस्थान में पंचायत चुनावों से ऐन पहले वोटर जागरूकता यात्रा को सुप्रीम कोर्ट से अनुमति नहीं मिली है. हालांकि इस दौरान कोर्ट ने राज्य चुनाव आयोग से कहा कि यात्रा की तारीख समय और स्थान का ब्योरा आवेदन में हो तो इजाजत देने में हर्ज क्या है? क्योंकि वोटर को जागरूक करने पर राज्य निर्वाचन आयोग का एकाधिकार थोड़े ही है.
एक एनजीओ ने मतदाता जागरूकता अभियान की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए प्रशासन अनुमति देने से इनकार कर रहा है. उनका दावा है कि चुनाव प्रचार बंद होने के बाद से कानून व्यवस्था दुरुस्त रखने की गरज से धारा 144/163 लागू कर दी गई है.
प्रशांत भूषण ने कहा कि यह महज मतदाता जागरूकता अभियान है. इसके जरिए लोगों को यह बताया जाता है कि वे 'नोटा' (NOTA) को वोट दे सकते हैं. उन्हें वोट के बदले रिश्वत नहीं लेनी चाहिए.
सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि क्या इस तरह के अभियान तब नहीं होने चाहिए, जब कोई चुनाव नजदीक न हो? यदि लोगों को यह विश्वास हो जाए कि आप किसी खास उम्मीदवार के लिए प्रचार कर रहे हैं, तो क्या होगा?
प्रशांत भूषण ने कहा कि कोर्ट इस यात्रा की तस्वीरें देखे. यह सिर्फ एक जागरूकता अभियान है. हम 2004 से ऐसा करते आ रहे हैं लेकिन आज तक कभी कोई समस्या नहीं आई.
CJI ने कहा कि हम राज्य चुनाव आयोग को इसमें पक्षकार बना रहे हैं. आपकी याचिका मूल रूप से लोकसभा चुनावों से पहले दायर की गई थी. राज्य निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि हमने इनके रिप्रेजेंटेशन की जांच की है. हम तो इस तरह के जागरूकता अभियान पहले से ही चला रहे हैं.
जस्टिस बागची ने कहा कि भले ही आप ऐसे अभियान चला रहे हैं, लेकिन आपका मतदाता जागरूकता अभियान पर कोई एकाधिकार थोड़े ही है. ये लोग आपके अभियान में सहायक हो सकते हैं. आप दूसरों को ऐसा करने से नहीं रोक सकते.
प्रशांत भूषण ने कहा कि हम मतदाताओं से कहते हैं कि रिश्वत न लें. हम उनसे कहते हैं कि यदि आपको कोई उम्मीदवार पसंद नहीं है तो नोटा को वोट दें, लेकिन बाहर निकलें और मतदान जरूर करें. उनका कहना है कि हम राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किसी भी अभियान या धरने की अनुमति नहीं दे रहे हैं. हमने अनुमति के लिए आवेदन किया था, लेकिन वे अनुमति नहीं दे रहे हैं.
जस्टिस बागची ने कहा कि आप अनुमति के लिए आवेदन करें. प्रशांत भूषण ने कहा कि हमने दो बार आवेदन किया. पंचायत चुनाव के लिए हमारा मतदाता जागरूकता कार्यक्रम है. उन्होंने यह कहते हुए अस्वीकृति भेज दी कि अनुमति देना संभव नहीं है.
जस्टिस बागची ने कहा कि आपको वह स्थान, समय और तारीख बतानी होगी, जब आप अभियान चलाने जा रहे हैं. आपने केवल एक सामान्य विचार दिया है. प्रशांत भूषण ने जवाब दिया कि हम 20 से ज्यादा लोग नहीं जाते हैं.
जस्टिस बागची ने फिर कहा कि आपको सभी ब्यौरे के साथ अनुमति मांगनी ही होगी. इस पर प्रशांत भूषण ने कहा कि जब तक शांति भंग होने की कोई खास आशंका न हो, वे चुनाव प्रचार की पूरी अवधि के दौरान धारा 163 लागू नहीं कर सकते. इस तरह के अंधाधुंध 163 आदेशों का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि अब चुनावों का केवल एक ही चरण बाकी बचा है.
संजय शर्मा