' पूर्व CJI चंद्रचूड़ के फैसलों पर नहीं, जजों की नियुक्ति पर उठाए सवाल', जस्टिस कौल की सफाई

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की नियुक्ति प्रक्रिया पर आलोचना को लेकर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी केवल नियुक्ति प्रक्रिया के रवैये तक सीमित थी, न कि न्यायिक फैसलों या कामकाज को लेकर.

Advertisement
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व सीजेआई पर टिप्पणी को लेकर सफाई दी है सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व सीजेआई पर टिप्पणी को लेकर सफाई दी है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 1:30 AM IST

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस संजय किशन कौल ने पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की आलोचना को लेकर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी केवल न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित थी, न कि चंद्रचूड़ के न्यायिक फैसलों या उनके कामकाज को लेकर. आजतक से हुई खास बातचीत में जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम को न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नामों पर पहले स्वतंत्र रूप से विचार करना चाहिए और उसके बाद सरकार से चर्चा होनी चाहिए.

Advertisement

जस्टिस कौल ने कहा, 'मैंने यह नहीं कहा कि वह सरकार के प्रति नरम थे. मैंने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया में उनका रुख सरकार के प्रति नरम था.' उन्होंने स्पष्ट किया कि चंद्रचूड़ के न्यायिक कार्यों और प्रशासनिक मामलों में उनके दृष्टिकोण के बीच अंतर है.

आत्मकथा को लेकर विवाद के बीच दी सफाई

जस्टिस कौल की यह टिप्पणी उनकी आगामी आत्मकथा 'विदाउट फियर ऑर फेवर' (Without Fear or Favour) को लेकर उठे विवाद के बीच आई है. इस किताब में उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर पूर्व CJI चंद्रचूड़ के रवैये पर सवाल उठाए हैं. साथ ही सरकार से सलाह-मशविरे की सीमा को लेकर दोनों के बीच हुए मतभेदों का भी जिक्र किया है.

'कॉलेजियम को पहले नामों पर फैसला लेना चाहिए'

जस्टिस कौल ने कहा कि उनका मानना है कि कॉलेजियम को पहले उम्मीदवारों के नामों पर विचार करके अपनी सिफारिश सरकार को भेजनी चाहिए. इसके बाद सरकार के साथ चर्चा होनी चाहिए. उन्होंने कहा, 'मेरा मानना था कि कॉलेजियम को नामों पर चर्चा करके उन्हें सरकार के पास भेजना चाहिए. सरकार से चर्चा उसी चरण में होनी चाहिए. हमें सरकार से किसी तरह की पूर्व मंजूरी नहीं लेनी चाहिए.'

Advertisement

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनकी आलोचना चंद्रचूड़ की न्यायिक क्षमता को लेकर नहीं थी. उन्होंने कहा कि वह पूर्व CJI के न्यायिक कार्यों की प्रशंसा कर चुके हैं. जस्टिस कौल के मुताबिक, न्यायाधीश अब भी काफी हद तक स्वतंत्र हैं और न्यायिक मामलों में सरकार के खिलाफ फैसले लेने में सक्षम हैं. हालांकि, प्रशासनिक मामलों में कुछ समस्याएं हैं और न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया उनमें से एक है.

नियुक्तियों को लेकर कैसे बढ़ा विवाद?

इंटरव्यू में जस्टिस कौल ने कॉलेजियम में अपने कार्यकाल के दौरान न्यायिक नियुक्तियों पर हुए मतभेदों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि नियुक्तियों को लेकर तीन चरणों में चर्चा हुई थी. पहले पांच नामों पर सहमति बनी थी. इसके बाद अंतिम समय में छठा नाम जोड़ने का प्रस्ताव आया, लेकिन कॉलेजियम के अन्य सदस्यों ने इसे मंजूरी नहीं दी.

इसके बाद दो और नाम प्रस्तावित किए गए, जबकि पहले पांच नामों की सिफारिशें लंबित थीं. जस्टिस कौल ने बताया कि उन्होंने इन दो नामों पर सहमति जताई थी, लेकिन यह शर्त रखी थी कि पहले पांच उम्मीदवारों की वरिष्ठता बरकरार रहनी चाहिए.

उन्होंने बताया कि जुलाई में एक अन्य उम्मीदवार के नाम पर चर्चा के दौरान मतभेद और बढ़ गए. इस नाम को लेकर सरकार की ओर से आपत्तियां सामने आई थीं. जस्टिस कौल ने कहा, 'उसी समय मैंने कहा कि अगर नियुक्ति प्रक्रिया इसी तरह चलनी है, तो मैंने अपनी फाइलें बंद कर दीं.' उन्होंने बताया कि इसके बाद अगली बैठक नवंबर में ही हुई.

Advertisement

'जजों की नियुक्तियों में बहुत ज्यादा समय लग रहा है'

जस्टिस कौल से जब पूछा गया कि क्या उच्च न्यायपालिका अपनी स्वतंत्रता खो रही है और कार्यपालिका को जरूरत से ज्यादा जगह दे रही है, तो उन्होंने न्यायिक फैसलों और प्रशासनिक कामकाज के बीच अंतर बताया. उन्होंने कहा कि उनकी चिंता मुख्य रूप से नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्तियों में लगातार देरी हो रही है. कई मामलों में कॉलेजियम की ओर से दोबारा सिफारिश किए जाने के बावजूद नियुक्तियां लंबित हैं.

उन्होंने कहा, 'हाई कोर्ट में नियुक्तियां अटकी हैं, सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां अटकी हैं. दोहराई गई सिफारिशें भी लंबित हैं. नियुक्तियों में बहुत ज्यादा समय लग रहा है.' दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए जस्टिस संजय किशन कौल ने जून 2022 से तत्कालीन CJI डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले कॉलेजियम में काम किया था.

जस्टिस कौल ने अपनी आत्मकथा में यह आशंका भी जताई है कि नियुक्तियों से पहले सरकार के साथ जरूरत से ज्यादा सलाह-मशविरा करने की परंपरा बन सकती है. ऐसा होने पर भविष्य के मुख्य न्यायाधीशों के लिए इसका विरोध करना मुश्किल हो सकता है, खासकर तब जब उनका कार्यकाल कम समय का हो.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »