SIR पर सियासी चिट्ठी! विपक्ष ने CJI को लिखा पत्र, चुनाव आयोग पर लगाए पक्षपात के आरोप

INDIA ब्लॉक ने सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को एक चिट्ठी लिखकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब बीजेपी ने भी तीखा पलटवार किया है, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है.

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INDIA गठबंधन ने बिहार चुनाव से ठीक पहले कराए गए SIR पर भी सवाल उठाया है. (Photo- ITGD) INDIA गठबंधन ने बिहार चुनाव से ठीक पहले कराए गए SIR पर भी सवाल उठाया है. (Photo- ITGD)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:16 PM IST

पिछले कुछ चुनावों से 'SIR' का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में गरमाया हुआ है और विपक्ष इसे किसी भी कीमत पर छोड़ने के मूड में नहीं है. इसी कड़ी में अब INDIA ब्लॉक ने सीधे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को एक चिट्ठी लिखकर चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. विपक्षी दलों की इस चिट्ठी की भाषा और आरोपों को लेकर अब बीजेपी ने भी तीखा पलटवार किया है, जिससे सियासी पारा चढ़ गया है.

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28 जून को लिखे गए इस चिट्ठी पर तृणमूल कांग्रेस (TMC), आम आदमी पार्टी (AAP), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत INDIA गठबंधन के 25 राजनीतिक दलों के हस्ताक्षर हैं. राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस चिट्ठी के जरिए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

चिट्ठी में कहा गया है कि चुनाव आयोग, विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त का रवैया निष्पक्ष नहीं रहा है. विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने वाले फैसलों में आयोग ने खुले तौर पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पक्ष लिया है.

चिट्ठी में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में सत्ताधारी दल के खिलाफ कार्रवाई करने से परहेज किया, जबकि विपक्षी दलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया. विपक्ष का आरोप है कि भाजपा नेताओं द्वारा कई मौकों पर सांप्रदायिक और भड़काऊ बयान दिए गए, लेकिन आयोग ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की और चुप्पी साधे रखी.

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INDIA गठबंधन ने बिहार में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कराए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर भी सवाल उठाया है. चिट्ठी में कहा गया है कि 2002 से मतदाता सूची का डिजिटलीकरण होने के बाद चुनाव आयोग नियमित रूप से मतदाता सूची का संशोधन और अद्यतन करता रहा है. ऐसे में चुनाव से ठीक पहले इस तरह की विशेष प्रक्रिया शुरू करना न केवल अनुचित है, बल्कि इसे लागू करने का तरीका भी गंभीर प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है.

बीजेपी ने चिट्ठी की भाषा पर जताई आपत्ति

उधर, भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष की इस चिट्ठी की भाषा और आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताई है. बीजेपी नेताओं का कहना है कि संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश है. पार्टी का आरोप है कि विपक्ष चुनावी हार की आशंका को देखते हुए पहले से ही चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है.

इस बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार नवंबर के बजाय सितंबर में भी चुनाव कराना चाहती है तो समाजवादी पार्टी पूरी तरह तैयार है. अखिलेश ने दावा किया कि जनता भाजपा को सत्ता से हटाने का इंतजार कर रही है और विपक्ष चुनाव के लिए किसी भी समय तैयार है.

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