'क्रिप्टोकरेंसी भारत के लिए खतरा...', RBI ने संसदीय समिति को किया आगाह

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति को स्पष्ट किया है कि क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा हैं.

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RBI ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी से आतंकवाद का खतरा बढ़ सकता है RBI ने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी से आतंकवाद का खतरा बढ़ सकता है

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:18 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति के सामने स्पष्ट कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी जैसी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए खतरा हैं और फिलहाल इन्हें कानूनी मान्यता नहीं दी जानी चाहिए. केंद्रीय बैंक का कहना है कि इन डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल आतंकवाद को आर्थिक मदद, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा सकता है.

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भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति की बैठक में 'वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) और आगे की राह' विषय पर चर्चा हुई. बैठक में RBI के अधिकारियों के साथ-साथ भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे. सूत्रों के मुताबिक, RBI ने समिति को बताया कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए वर्चुअल डिजिटल एसेट्स गंभीर जोखिम पैदा कर सकते हैं. 

केंद्रीय बैंक ने कहा कि मौजूदा समय में इन्हें कानूनी मान्यता देना ठीक नहीं होगा. RBI ने यह भी बताया कि क्रिप्टोकरेंसी के जरिए आतंकवाद के वित्तपोषण, ड्रग्स की तस्करी और अन्य अवैध वित्तीय लेनदेन किए जाने की आशंका बनी रहती है. क्रिप्टो ट्रेडिंग में शामिल विदेशी (ऑफशोर) संस्थाओं पर निगरानी रखना बेहद मुश्किल होता है. इससे नियामक एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी होती हैं और ऐसे लेनदेन पर प्रभावी नियंत्रण करना आसान नहीं है.

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बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने पत्रकारों से कहा कि RBI भारत में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स को कानूनी दर्जा देने के पक्ष में नहीं है. उन्होंने यह भी बताया कि समिति आयकर कानून के तहत VDA से जुड़े प्रावधानों की भी समीक्षा कर रही है.

वहीं, भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) ने समिति के सामने व्यापक VDA कानून बनाने का समर्थन किया. संस्थान का कहना है कि वह सिद्धांत-आधारित ढांचा और आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करने में सरकार की मदद कर सकता है, जिससे निवेशकों और अन्य हितधारकों के लिए नियम अधिक स्पष्ट हो सकें.  
 

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