राम मंदिर चढ़ावा चोरी: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नई SIT गठित, चार्टर्ड अकाउंटेंट भी होगा सदस्य

अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के लिए नई SIT गठित की है. इस टीम में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल होंगे. अदालत ने जांच की गुणवत्ता और तेजी पर जोर दिया है.

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राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. (Photo- PTI) राम मंदिर चंदा चोरी मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. (Photo- PTI)

संजय शर्मा / सृष्टि ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 27 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:10 PM IST

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने उत्तर प्रदेश सरकार ने अपना पक्ष रखा. राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले की पारदर्शी जांच के लिए दोबारा SIT बना दी गई है.

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सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों का पालन करते हुए इस नई एसआईटी की कमान वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है. सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के मुताबिक लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस को इस एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है.

इस तीन सदस्यीय एसआईटी में आईजी किरण एस के अलावा दो और सीनियर आईपीएस अधिकारियों को शामिल किया गया है. इनमें अयोध्या रेंज के उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) सोमेन बर्मा और अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) गौरव ग्रोवर शामिल हैं.

SIT में शामिल होगा फाइनेंशियल ऑडिटर

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए टीम में किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी शामिल किया जाना चाहिए. अदालत के इस सुझाव पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सहमति जताई और अदालत को भरोसा दिलाया कि एसआईटी में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट को भी शामिल किया जाएगा. 

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इस दौरान कोर्ट ने कहा, ये कहा गया है कि राज्य ने SIT बनाने का आदेश जारी किया है. क्योंकि जांच में फंड की हेराफेरी शामिल है, इसलिए SG इस बात पर सहमत हो गया है कि फोरेंसिक ऑडिट के अनुभव वाले एक ऑडिटर को भी SIT के सदस्य के तौर पर जोड़ा जाएगा. हम SIT को चल रही जांच पर स्टेटस रिपोर्ट जमा करने का निर्देश देते हैं.'

अदालत ने बताया कि इस समय अदालत का पूरा ध्यान राम मंदिर चंदा चोरी मामले की निष्पक्ष और गहरी जांच कराने पर है. अदालत ने कहा 'हमें तेजी से, गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करनी चाहिए.'

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से मांग रखी कि राम मंदिर ट्रस्ट को मिली सभी रसीदों को क्षेत्रवार वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए, ताकि आम जनता को इसकी पूरी जानकारी मिल सके. उन्होंने कहा कि ये कोई विरोधात्मक याचिका नहीं है बल्कि पारदर्शिता के लिए जरूरी है. याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने कहा कि देश भर से लोगों ने सौ पांच सौ हजार रूपए देते हैं. उनका ब्यौरा भी ट्रस्ट की वेब साइट पर होना चाहिए.

यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच चंपत राय का बड़ा फैसला: अयोध्या में शुरू की 4 महीने की 'चातुर्मास साधना'

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इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिकाकर्ता के सुझाव का विरोध किया और कहा कि इस नाजुक मामले को बिना मतलब सनसनीखेज न बनाया जाए. सीजेआई ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिटर भी समिति में होना चाहिए. हम चाहते हैं कि गुणवत्तापूर्ण, पारदर्शी और समय से जांच हो. 

2 हफ्ते बाद अगली सुनवाई

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार की गठित की गई SIT मैं नियुक्त किए गए तीन आईपीएस अधिकारियों को रिकॉर्ड पर लिया. साथ ही कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगली सुनवाई पर इस मामले में SIT अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करेगी. इस मामले की सुनवाई अब 2 हफ्ते बाद होगी.

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