लाल चौक पर झंडा फहराने के बाद पीएम मोदी ने किसे किया था सबसे पहला फोन?

पीएम मोदी ने बताया, 'तिरंगा झंडा फहराने के बाद हम जम्मू आए तो मैंने जम्मू से पहला फोन मेरी मां को किया. मेरे लिए वो एक खुशी का पल था और दूसरा मन में था कि मां को चिंता होती होगी कि ये गोलियां चली हैं और ये कहां गया है. तो मुझे याद है कि मैंने पहला फोन मां को किया था. मुझे उस फोन का महत्मय आज समझ आता है. वैसी फीलिंग मुझे और कहीं नहीं आई.'

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पीएम मोदी का पहला पॉडकास्ट (फोटो: PIB) पीएम मोदी का पहला पॉडकास्ट (फोटो: PIB)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 11:34 PM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले पॉडकास्ट में अपनी निजी जिंदगी से लेकर राजनीतिक सफर से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए. पीएम मोदी से बातचीत की Zerodha के को-फाउंडर निखिल कामथ ने. इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने 90 के दशक का वो किस्सा सुनाया जब पंजाब में बीजेपी की एकता यात्रा पर हमला हो गया था. इसके बावजूद वह कश्मीर के लाल चौक पहुंचे और तिरंगा फहराया. 

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इंटरव्यू में पीएम मोदी से पूछा गया, अगर सोचिए कि कल आपकी जिंदगी में एक ऐसा इवेंट हो, जिससे आपको सबसे ज्यादा खुशी मिले, तो आपका पहला कॉल किसको जाएगा. जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा, 'मैं जब श्रीनगर के लाल चौक में तिरंगा फहराने गया था और पंजाब में फगवाड़ा के पास हमारी यात्रा पर अटैक हो गया, गोलियां चलीं, पांच-छह लोग मारे गए. काफी लोग घायल हुए. पूरे देश में एक तनाव था कि क्या होगा श्रीनगर लाल चौक में. तब तो लाल चौक पर झंडा फहराना भी बड़ा मुश्किल था. झंडे को जला दिया जाता था.'

तिरंगा फहराने के बाद मां को किया फोन

उन्होंने बताया, 'तिरंगा झंडा फहराने के बाद हम जम्मू आए तो मैंने जम्मू से पहला फोन मेरी मां को किया. मेरे लिए वो एक खुशी का पल था और दूसरा मन में था कि मां को चिंता होती होगी कि ये गोलियां चली हैं और ये कहां गया है. तो मुझे याद है कि मैंने पहला फोन मां को किया था. मुझे उस फोन का महत्मय आज समझ आता है. वैसी फीलिंग मुझे और कहीं नहीं आई.'

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पीएम ने सुनाया मां से जुड़ा किस्सा

मां के देहांत से जुड़े सवाल के जवाब में पीएम मोदी ने कहा, 'मेरा जीवन वैसा नहीं है क्योंकि मैं बचपन में घर छोड़ चुका था, तो घर के लोगों ने भी मान लिया था कि ये हमारा नहीं है. मैंने भी मान लिया था कि मैं घर के लिए नहीं हूं. इसलिए उस प्रकार का अटैचमेंट किसी को भी फील होने का कारण नहीं था, लेकिन जब हमारी माताजी 100 साल की हुईं, तो मैं मां के पैर छूने के लिए गया था. अब 100 साल की उम्र, मेरी मां पढ़ी-लिखी नहीं थी. उनको अक्षर तक का ज्ञान नहीं था तो मैंने जाते-जाते कहा कि मां मुझे तो निकलना पड़ेगा, मेरा काम है.'

'काम करो बुद्धि से, जीवन जियो शुद्धि से'

उन्होंने आगे बताया, 'मैं हैरान था, मेरी मां ने दो वाक्य कहे. काम करो बुद्धि से, जीवन जियो शुद्धि से. अब ये वाक्य उनके मुंह से निकलना मेरे लिए ये एक प्रकार से बहुत बड़ा खजाना था. तो मैं सोचता था कि परमात्मा ने इस मां को क्या कुछ नहीं दिया होगा, क्या विशेषता होगी तो कभी लगता है कि मैं उनके पास रहता तो मैं शायद ऐसी बहुत सी चीजें निकाल सकता था, जान सकता था, तो उसकी कमी महसूस होती है.'

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