नीट-यूजी पेपर लीक मामले में सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में बड़ा खुलासा किया है. जांच में पता चला है कि पेपर लीक की शुरुआत नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए के साथ काम कर रहे विषय विशेषज्ञों से हुई थी. इन विशेषज्ञों ने अपनी अधिकृत पहुंच का गलत इस्तेमाल करके पेपर का कंटेंट बाहर निकाला. इसके बाद यह पेपर कई राज्यों से होते हुए जयपुर तक पहुंचा, जहां इसे छापकर बांटा गया. सीबीआई ने फोरेंसिक जांच, पैसों के लेनदेन के सबूत और नकदी बरामद करके इस पूरे नेटवर्क को उजागर किया है.
चार्जशीट के मुताबिक यह लीक एनटीए के अंदर कागज के गोपनीय अनुवाद, पुनः अनुवाद और प्रूफरीडिंग के दौरान हुआ. इसमें तीन कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे विशेषज्ञ शामिल थे. बॉटनी और जूलॉजी की जिम्मेदारी मनीषा गुरुनाथ मांधरे के पास थी, केमिस्ट्री की जिम्मेदारी प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी यानी पीवी कुलकर्णी के पास थी और फिजिक्स की जिम्मेदारी मनीषा संजय हवलदार के पास थी.
अप्रैल 2026 में इन लोगों ने पूरे छपे हुए पेपर लीक करने के बजाय सवालों का कंटेंट निकालने का तरीका अपनाया. कुलकर्णी और मांधरे ने पुणे में अपने घरों पर गुपचुप तरीके से खास रिवीजन सेशन आयोजित किए. इन सेशन में वे छात्रों को सवाल, विकल्प और सही जवाब जुबानी बोलकर बताते थे, जिन्हें छात्र नोटबुक में लिख लेते थे. वहीं हवलदार ने फिजिक्स के सवाल कोचिंग टीचरों को बताए, जिन्होंने इन्हें हाथ से लिखा और फोटो भी खींची.
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हवलदार ने फिजिक्स के सवाल तेजस हर्षदकुमार शाह को दिए, जो पुणे के एपीएमए में फिजिक्स पढ़ाते थे. हवलदार के फोन में तेजस का नंबर "गॉड" नाम से सेव था. तेजस ने हाथ से लिखे नोट्स की फोटो खींचकर लातूर की रेणुकाई करियर सेंटर के डायरेक्टर प्रोफेसर शिवराज मोतेगांवकर को भेजी. इसके बदले तेजस ने हवलदार के पति के नाम रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ऑनलाइन पैसे भेजे.
दूसरी तरफ कुलकर्णी और मांधरे ने पुणे के डॉक्टर मनोज भगवानराव शिरुरे से हाथ मिलाया, जो लातूर में बाल रोग विशेषज्ञ हैं. इनकी मदद से चुनिंदा छात्रों को लातूर के सिद्धिविनायक अस्पताल बुलाकर परीक्षा से पहले सवाल याद कराए गए.
पेपर महाराष्ट्र से बाहर कैसे पहुंचा, इसकी कड़ी नासिक के शुभम खैरनार और गुरुग्राम के यश यादव से जुड़ती है. लीक हुए सवालों को पीडीएफ में बदलकर टेलीग्राम के जरिए यादव को भेजा गया. यादव ने यह पीडीएफ जयपुर के मंगीलाल बिवाल, जिसे मंगीलाल खटीक भी कहा जाता है, को 10 से 12 लाख रुपये में बेची. मंगीलाल ने पेपर की छपाई कराकर इसे अपने परिवार के परीक्षा देने वाले सदस्यों, कोचिंग के छात्रों और प्राइवेट ट्यूटरों तक पहुंचाया.
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सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और जीईक्यूडी की हैंडराइटिंग जांच में यह पुष्टि हुई कि छापेमारी में जब्त की गई छात्रों की नोटबुक 3 मई को हुई असली नीट-यूजी परीक्षा के सवालों से मेल खाती हैं. जांच एजेंसियों को हवलदार के परिवार को भेजे गए डिजिटल पेमेंट के सबूत मिले हैं. साथ ही डॉक्टर शिरुरे के एक परिजन से 5 लाख रुपये नकद भी बरामद हुए हैं.
अंशुल सिंह