105 दिन में 1.25 लाख ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों ने सीखी मराठी, शिंदे बोले- मराठी मजबूरी नहीं, लगाव है

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को बताया कि राज्य में 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने मराठी भाषा सीख ली है. उनका कहना है कि राज्य में तीन महीने तक चले इस अभियान में अच्छी सफलता मिली है. और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा.

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महाराष्ट्र में 1.25 लाख ऑटो रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने सीखी मराठी महाराष्ट्र में 1.25 लाख ऑटो रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों ने सीखी मराठी

aajtak.in

  • मुंबई,
  • 18 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 8:24 AM IST

महाराष्ट्र में 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों ने मराठी भाषा सीख ली है. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद सोमवार को बताया कि 105 दिनों तक चले व्यापक अभियान के तहत लगभग 1.25 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को व्यावहारिक मराठी भाषा का प्रशिक्षण दिया गया और इन लोगों ने व्यावहारिक मराठी सीख ली है. 

ठाणे में आयोजित एक कार्यक्रम में इन प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिए गए. एकनाथ शिंदे ने कहा कि मराठी भाषा लगाव और श्रद्धा की भाषा है, यह किसी की मजबूरी नहीं है. उनका कहना है कि लोगों का अपनी मर्जी से इस भाषा को अपनाना राज्य की सांस्कृतिक एकता को दर्शाता है. यह अभियान लगभग साढ़े तीन महीने चला. इसमें 1,65,600 से ज़्यादा ट्रांसपोर्ट वर्कर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था.

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महाराष्ट्र में 105 दिनों तक 'हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा पाठ्यक्रम अभियान' चलाया गया और इसमें लोगों को मराठी भाषा का प्रशिक्षण दिया गया. महाराष्ट्र परिवहन विभाग, राज्य मराठी विकास संस्थान, मुंबई मराठी साहित्य संघ और कोंकण मराठी साहित्य परिषद ने संयुक्त रूप से इसका आयोजन किया था. उपमुख्यमंत्री शिंदे ने इसे एक मजबूत शुरुआत बताया. 

क्या बोले एकनाथ शिंदे

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कहना है कि मातृभाषा के प्रति लगाव और मराठी का सम्मान ही महाराष्ट्र की असली ताकत है. राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की सराहना करते हुए शिंदे ने कहा कि भाषा प्यार से सीखी जाती है, कानून से नहीं. उन्होंने महाराष्ट्र के लोगों से अपील करते हुए कहा कि मराठी सीखने वाले लोगों का मजाक उड़ाने की बजाय उनसे महाराष्ट्र की आधिकारिक भाषा में बातचीत करें. 

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र विधानसभा में मराठी उच्चारण को लेकर हंगामा! स्पीकर ने दी सफाई

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इस कार्यक्रम में शिंदे ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल में किए गए फैसलों का भी जिक्र किया. शिंदे ने बताया कि उन्होंने मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा किया, लड़कियों की उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के कदम उठाए, राज्य परिवहन की बसों में महिलाओं के लिए 50% रियायत और आधिकारिक रिकॉर्ड में मां का नाम शामिल करने का फैसला किया था. 

अपने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए शिंदे ने ट्रांसपोर्ट वर्कर्स के लिए सरकार द्वारा किए गए फैसलों की सराहना की. उनका कहना है कि महाराष्ट्र को अपनी भाषाई अस्मिता की रक्षा करनी चाहिए. शिंदे का कहना है कि भाषा लोगों को बांटने की बजाय जोड़ने वाली होनी चाहिए. 

मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने बताया कि इस अभियान के अगले चरण का मकसद ड्राइवरों में मराठी भाषा की बेहतर समझ विकसित करना है, जिससे वे भाषा को साहित्यिक स्तर तक ले जा पाएं. 

कैब ड्राइवर्स के लिए भी मराठी अनिवार्य

बीते दिनों महाराष्ट्र सरकार ने नए नियम जारी किए थे. इन नए नियमों के तहत टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य कर दी गई थी. नियम में कहा गया कि सभी अधिकृत कैब ड्राइवरों और परमिट धारकों को मराठी आनी चाहिए. साथ ही, इसमें यह भी कहा गया है कि अगर किसी ड्राइवर को मराठी नहीं आती है तो उसे मराठी सीखने के लिए एक महीने का समय दिया जाएगा. 

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इस नियम के तहत कुछ कड़े प्रावधान भी किए गए हैं. नियम का पालन नहीं करने पर टैक्सी और कैब ड्राइवरों के ड्राइविंग लाइसेंस भी तीन महीने तक सस्पेंड किए जा सकते हैं. और अगर कोई लगातार नियम तोड़ता पाया गया तो उसका ऑथराइजेशन भी रद्द किया जा सकता है. इसके अलावा, टैक्सी परमिट का रिन्यूअल के लिए भी मराठी भाषा को अनिवार्य किया गया है.

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