'मंदिर घूमने की जगह नहीं', गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

आगमिक मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि दूसरे धर्म के धार्मिक चिह्न धारण करने वाले और संबंधित देवता के प्रति श्रद्धा व्यक्त नहीं करने वाले गैर-हिंदुओं को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती.

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कोर्ट ने गैर-हिंदुओं की एंट्री पर सख्त आदेश दिया है. (Representational Image-AI Generated) कोर्ट ने गैर-हिंदुओं की एंट्री पर सख्त आदेश दिया है. (Representational Image-AI Generated)

अनीषा माथुर

  • चेन्नई,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:19 PM IST

तमिलनाडु की मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर अहम आदेश दिया है. कोर्ट ने कहा कि आगमिक मंदिर सिर्फ घूमने की जगह नहीं हैं. ये पूजा और आस्था के केंद्र हैं. यहां आने वाले लोगों को मंदिर की परंपराओं और नियमों का सम्मान करना चाहिए.

कोर्ट ने कहा कि अगर कोई गैर-हिंदू किसी आगमिक मंदिर में किसी देवी-देवता के दर्शन और पूजा के लिए आना चाहता है, तो उसे इस बारे में हलफनामा देना होगा. इसमें उसे बताना होगा कि वह मंदिर में श्रद्धा के साथ आ रहा है और वहां के नियमों का पालन करेगा.

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'मंदिर में घूमने के लिए नहीं जा सकते'

कोर्ट ने कहा कि मंदिरों में प्रवेश को सिर्फ पर्यटन की तरह नहीं देखा जा सकता. मंदिरों की अपनी धार्मिक परंपराएं होती हैं. वहां आने वाले लोगों को इन परंपराओं का सम्मान करना चाहिए. कोर्ट का कहना है कि , आगमिक मंदिरों में प्रवेश के नियमों का पालन जरूरी है. हालांकि, यह आदेश सभी मंदिरों पर लागू नहीं होगा. यह सिर्फ आगमिक परंपराओं के अनुसार चलने वाले मंदिरों से जुड़ा है.

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कोर्ट ने यह भी साफ किया कि मंदिर में प्रवेश के लिए किसी व्यक्ति का हिंदू धर्म अपनाना जरूरी नहीं है. लेकिन अगर कोई गैर-हिंदू पूजा या दर्शन के लिए आता है, तो उसे मंदिर की धार्मिक परंपराओं का सम्मान करने की बात लिखकर देनी होगी. यानी कोर्ट ने धर्म बदलने की शर्त नहीं रखी है. उसने मंदिर में आने के मकसद और वहां के नियमों के पालन पर जोर दिया है.

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नेताओं के मंदिर जाने पर भी की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मंदिरों में नेताओं के जाने के मुद्दे पर भी टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा कि मंदिरों को राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नहीं बनाया जाना चाहिए. मंदिरों की धार्मिक पहचान और परंपराएं बनी रहनी चाहिए.

सुनवाई के दौरान मंदिर के टावर पर चढ़ने और वहां वीडियो बनाने जैसे मामलों का भी जिक्र हुआ. कोर्ट ने मंदिरों की परंपराओं और नियमों का पालन करने की जरूरत पर जोर दिया. कोर्ट ने कहा कि, मंदिर में आने वाले लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनका व्यवहार वहां की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ न हो.

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मुख्यमंत्री विजय के हलफनामे का दिया उदाहरण

सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री विजय से जुड़े हलफनामे का भी जिक्र किया गया. कोर्ट ने इस उदाहरण के जरिए बताया कि मंदिर में प्रवेश करने वाले व्यक्ति को अपनी मंशा साफ करनी चाहिए और मंदिर के नियमों का सम्मान करना चाहिए.

कोर्ट का यह आदेश हर मंदिर के लिए नहीं है. यह खास तौर पर आगमिक मंदिरों से जुड़ा है. आगमिक परंपराओं में पूजा-पाठ और मंदिर से जुड़े कामों के लिए खास नियम होते हैं. इसलिए इस आदेश को सभी मंदिरों और सभी तरह के धार्मिक स्थलों पर लागू नहीं माना जा सकता.

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कोर्ट ने अपने आदेश में मंदिर की परंपराओं, धार्मिक आस्था और नियमों के सम्मान पर जोर दिया. कोर्ट के मुताबिक, मंदिर में प्रवेश करने वाले लोगों को वहां की धार्मिक व्यवस्था का पालन करना चाहिए. गैर-हिंदुओं के लिए हलफनामे की शर्त भी इसी संदर्भ में रखी गई है. कोर्ट ने यह नहीं कहा कि मंदिर में प्रवेश के लिए धर्म बदलना जरूरी है.

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