क्यों पैंगोंग से पीछे हटने को मजबूर हुआ चीन? नॉर्दन आर्मी कमांडर ने बताई इनसाइड स्टोरी

कारगिल युद्ध के हीरो रहे लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी वीर चक्र से सम्मानित हैं. लद्दाख में भारत का पूरा ऑपरेशन उन्हीं की कमांड पर हुआ है. उन्होंने ऑपरेशन Snow Leopard पर इंडिया टुडे से बातचीत की है और डीटेल्स शेयर की.

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नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी

गौरव सावंत

  • नई दिल्ली ,
  • 18 फरवरी 2021,
  • अपडेटेड 9:08 AM IST
  • नॉर्दन आर्मी कमांडर ने इंडिया टुडे से की खास बातचीत
  • भारत की कार्रवाइयों ने चीनी सेना को हैरान किया
  • डिसएंगेजमेंट के बाद कॉर्प्स कमांडर की 10वें दौर की वार्ता होगी

पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग लेक क्षेत्र में भारत और चीन के बीच डिसएंगेजमेंट पर सहमति बनी है. जिसके बाद टकराव वाले क्षेत्र से सेना की तैनाती हटाई जा रही है. इस बीच इंडिया टुडे संवाददाता गौरव सावंत ने भारत के नॉर्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी से लेह में बात की. 

बता दें कि कारगिल युद्ध के हीरो रहे लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी वीर चक्र से सम्मानित हैं. लद्दाख में भारत का पूरा ऑपरेशन उन्हीं की कमांड पर हुआ है. उन्होंने ऑपरेशन Snow Leopard पर इंडिया टुडे से बातचीत की है और डीटेल्स शेयर की. वाई के जोशी चीनी भाषा मंदारिन धाराप्रवाह बोलते हैं. वे बीजिंग में भारत के रक्षा प्रशिक्षक के रूप में तैनात थे. उन्होंने बातचीत के दौरान जोर देकर कहा कि भारत ने अपने किसी भी क्षेत्र को नहीं गंवाया है. पैंगोंग त्सो में सेना की वापसी भारत के लिए एक जीत है. 

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दरअसल, पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो लेक के दक्षिण और उत्तरी तट पर भारत की कार्रवाइयों ने चीनी सेना को हैरान कर दिया था. भारत कई जगहों पर चीन से मजबूत स्थिति में था, इसलिए चीनी सेना ने जान लिया कि भारत अपनी मांगों से पीछे हटने वाला नहीं है और पूर्व की स्थिति को बहाल करना ही पड़ेगा. अहम चोटियों पर भारतीय सेना का कब्जा करना, एक टर्निंग पॉइंट था. लेफ्टिनेंट जनरल ने बताया कि चीनी सेना को यह संदेश मिला कि वे बल के प्रयोग द्वारा LAC की स्थिति को एकतरफा नहीं बदल सकते. भारत अपने क्षेत्र की मजबूती से हिफाजत करेगा. 

उन्होंने बताया कि 29-30 अगस्त की दरमियानी रात को रेजांग ला और रेचिन ला पर हमारे सैनिकों ने कब्जा कर लिया. इससे भारतीय सेना दबदबे के पोजिशन पर आ गई. जब अगले दौर की बातचीत हुई तो भारत का पलड़ा भारी था. 

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पैंगोंग लेक क्षेत्र

इंडिया टुडे से बात करते हुए नॉर्दन आर्मी कमांडर ने बताया कि इस वक्त डिसएंगेजमेंट प्रोसेस चल रहा है. ये प्रोसेस 10 फरवरी से शुरू हुआ था. इसे चार चरणों में पूरा होना है. पहले चरण में टैंक-बख्तरबंद गाड़ियों की वापसी हो चुकी है. दूसरे और तीसरे चरण में उत्तर और दक्षिण बैंक से इंफ्रेंटी को डिसएंगेज किया जाएगा. जबकि चौथे चरण में कुछ अहम चोटियों से डिसएंगेजमेंट प्रोसेस होगा. उन्होंने बताया कि हर डिसएंगेजमेंट को हम वेरीफाई कर रहे हैं. चीनी सेना फिंगर 4 से फिंगर 8 के पीछे जा रही है. यहां उसने काफी निर्माण कर लिया था.

नॉर्दन आर्मी कमांडर ने बताया कि डिसएंगेजमेंट के बाद कॉर्प्स कमांडर की 10 वें दौर की वार्ता होगी. जिसमें गोगरा, हॉटस्प्रिंग और डेपसांग सहित अन्य टकराव वाले मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत तेजी से लद्दाख में बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है. सेना LAC पर अपने दावे की रक्षा करने में सक्षम है.  

डिसएंगेजमेंट प्रोसेस (फोटो- इंडियन आर्मी)

बता दें कि डिसएंगेजमेंट प्लान के मुताबिक, चीन फिंगर आठ के पास चला जाएगा और भारत पीछे हटकर फिंगर 3 के पास अपने धन सिंह थापा पोस्ट के पास चला जाएगा. इसके अलावा दक्षिणी किनारे पर मौजूद तैनाती को भी हटा लिया जाएगा. इसके बाद जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती है दोनों देशों की ओर से पैट्रोलिंग नहीं होगी.  

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मालूम हो कि चीन ने पैंगोंग लेक के टकराव वाले क्षेत्र से अपने बंकरों को तोड़ दिया है. तंबू उखाड़ दिए हैं और अपनी तोपों को भी हटा दिया है. अब चीन की सेना इस स्थान को खाली कर रही है. भारतीय सेना द्वारा जारी तस्वीरों के अनुसार कई चीनी सैनिक वापस अपने परमानेंट पोस्ट की ओर जा रहे हैं, साथ ही टकराव के बिंदु पैंगोंग के दक्षिणी किनारे पर चीन ने जो टैंक तैनात किए थे, उसे भी वापस ले जा रहा है.

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