केरल विधानसभा ने केंद्र सरकार से फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) में किए गए संशोधनों को तुरंत वापस लेने की मांग करने वाला एक प्रस्ताव को बुधवार को पारित कर दिया. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव के पक्ष में 111 वोट पड़े हैं, जबकि इस के विरोध में सिर्फ दो वोट पड़े.
केरल सरकार का कहना है कि ये कदम राज्य सरकार द्वारा विदेशी फंडिंग नियमों में केंद्रीय बदलावों से स्थानीय संगठनों को होने वाली दिक्कतों को दूर करने के उद्देश्य से उठाया गया है.
BJP विधायक ने दिए चार सुझाव
एफसीआरए के खिलाफ लाए गए केरल सराकर के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बीजेपी विधायक वी मुरलीधरन ने चार बदलावों का सुझाव दिया था, जबकि एलडीएफ विधायक पी प्रसाद ने भी कुछ संशोधन सुझाए थे. हालांकि, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने स्पष्ट किया कि वी मुरलीधरन द्वारा सुझाए गए बदलाव इस प्रस्ताव की मूल भावना और बुनियादी ढांचे के पूरी तरह खिलाफ थे, जिसके कारण उन्हें कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता था. इसके विपरीत, मुख्यमंत्री ने एलडीएफ द्वारा प्रस्तुत किए गए संशोधनों के एक हिस्से को स्वीकार कर लिया.
प्रस्ताव के समर्थन में पड़े 111 वोट
सदन में विस्तृत बहस और संशोधन प्रस्तावों पर स्थिति साफ होने के बाद इस ऐतिहासिक संकल्प को अंतिम रूप से मतदान के लिए रखा गया. वोटिंग के दौरान कुल 111 सदस्यों ने इसके पक्ष में खड़े होकर अपनी सहमति जताई, जबकि इसके विरोध में सिर्फ दो वोट पड़ जो बीजेपी विधायकों के थे. इस महत्वपूर्ण सत्र और वोटिंग प्रक्रिया के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजीव चंद्रशेखर विधानसभा में उपस्थित नहीं थे.
क्या है FCRA
FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (Foreign Contribution Regulation Act). ये वो कानून है, जिसके तहत भारत में काम करने वाले गैर-सरकारी संगठन (NGOs), ट्रस्ट, सोसाइटी और अन्य संस्थाएं विदेश से आर्थिक सहायता प्राप्त करती हैं. ये कानून पहली बार वर्ष 1976 में लागू किया गया था. बाद में साल 2010 में इसे नए स्वरूप में लागू किया गया.
इस कानून का उद्देश्य ये सुनिश्चित करना है कि विदेशी फंड का इस्तेमाल देश की संप्रभुता, सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक हितों के खिलाफ न हो. FCRA पंजीकरण की वैधता अवधि पांच वर्ष होती है. इसके बाद उसका नवीनीकरण कराना जरूरी होता है.
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