कार्ति चिदंबरम बोले- हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं, लोगों पर इसे थोपना बंद करें

कार्ति चिदंबरम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान के जवाब में ट्वीट करते हुए यह बात कही. शाह ने कहा कि हिंदी भाषा सदियों से लोगों को एकजुट करती रही है.

Advertisement
कार्ति चिदंबरम कार्ति चिदंबरम

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 7:48 PM IST
  • हिंदी और तमिल भाषा को लेकर विरोध जारी
  • पी चिदंबरम भी तमिल के समर्थन में उतरे
  • चिदंबरम बोले- तमिल की जड़ें 2600 साल पुरानी

हिंदी दिवस पर कांग्रेस नेता और तमिलनाडु से सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा है कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है और हिंदी को लोगों पर नहीं थोपा जाना चाहिए. कार्ति चिदंबरम ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक बयान के जवाब में ट्वीट करते हुए यह बात कही. शाह ने कहा है कि हिंदी भाषा सदियों से लोगों को एकजुट करती रही है.

Advertisement

कार्ति चिदंबरम के पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने भी हिंदी दिवस को लेकर अपनी बात रखी है. उन्होंने ट्वीट में लिखा, हिंदी भाषी लोगों को हिंदी दिवस मनाते हुए देखकर खुशी हो रही है. तमिल भाषी लोगों को इस बात का गर्व है कि भारत में तमिल सबसे प्राचीन भाषाओं में एक है. चिदंबरम ने इसका प्रमाण देते हुए ट्वीट में लिखा, किलाडी और और उसके आसपास के इलाकों में पुरातात्विक खुदाई से पता चलता है कि तमिल सभ्यता की जड़ें 2600 साल पुरानी हैं.

बता दें, हिंदी को लेकर उत्तर और दक्षिण भारत में विरोध की स्थिति देखी जाती रही है. दक्षिण भारत की लगभग सभी पार्टियां हिंदी को मुद्दा बनाती हैं और उनका कहना है कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा नहीं है. दक्षिण भारत की कई पार्टियां ऐसी हैं जिनकी राजनीति हिंदी विरोध पर आधारित रही है. जबकि उत्तर भारत के लोग हिंदी को ही अपनी प्रमुख भाषा मानते हैं और बोलचाल में इसकी प्रमुखता देखी जाती है. दूसरी ओर दक्षिण भारत में हिंदी का इस्तेमाल बेहद कम होता है.

Advertisement

अगस्त महीने में हिंदी और गैर-हिंदी भाषा को लेकर एक घटना सामने आई थी. आयुष मंत्रालय के सचिव राजेश कोटेचा पर आरोप लगा था कि उन्होंने एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस से गैर हिंदी भाषियों को लेकर भेदभावपूर्ण बयान दिया था. कोटेचा के कथित बयान को लेकर तमिलनाडु में सियासत तेज हो गई. डीएमके सांसद कनिमोझी ने आयुष मंत्री श्रीपद नाइक को पत्र लिखकर विभाग के सचिव के इस भेदभावपूर्ण बयान की निंदा की थी. कनिमोझी ने आयुष मंत्री से इसकी जांच कराने और आयुष सचिव के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. डीएमके सांसद ने यह मांग भी की कि सभी मंत्रालयों के आयोजन अंग्रेजी भाषा में हों.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »