'जामिया क्या उनके बाप का है?', FIR पर भड़के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद, बोले- छात्रों से मिलने जरूर जाऊंगा

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर विवाद बढ़ रहा है. दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, इमरान मसूद समेत अन्य नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की है. इमरान मसूद ने कहा है कि FIR के बावजूद वे छात्रों से मिलने जाएंगे.

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इमरान मसूद ने साफ कहा कि वे छात्रों से मिलने जामिया जाएंगे. (Photo: PTI) इमरान मसूद ने साफ कहा कि वे छात्रों से मिलने जामिया जाएंगे. (Photo: PTI)

राहुल गौतम

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी विवाद बढ़ता ही जा रहा है. रविवार को यूनिवर्सिटी प्रशासन की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी, इमरान मसूद समेत अन्य नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज दर्ज की. इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने साफ कर दिया है कि वह छात्रों से मिलने जरूर जाएंगे. उन्होंने कहा कि छात्रों से मिलने से उन्हें कोई नहीं रोक सकता. 

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इमरान मसूद ने साफ कहा कि वे छात्रों से मिलने जामिया जाएंगे, फिर चाहे उनके ऊपर कितनी भी FIR क्यों न दर्ज हो. उन्होंने कहा, 'जामिया क्या उनके बाप की यूनिवर्सिटी है? कैसे नहीं जाने देंगे मुझे, मिलने नहीं देंगे हमें अपने बच्चों से. जितनी मर्जी FIR कर लो. हम जाएंगे.'

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर भी देश भर में सियासत तेज हो गई है. बीजेपी मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ देश भर में इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाली है. इस मामले में कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने मल्लिकार्जुन खरगे का बचाव किया है. उनका कहना है कि बीजेपी नेता खुद इसी तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं ऐसे में उन्हें ऐसे ही जवाब मिलेगा.

यह भी पढ़ें: कांग्रेस दफ्तर में बवाल पर अजय राय ने मांगी माफी, बोले- वाराणसी से सांसद बनना सपना है

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बता दें, सोमवार को जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी ने लगभग दो दशक के बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का ऐलान किया है. यूनिवर्सिटी द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे. हालांकि, संविधान को मंजूरी देने की निश्चित तारीख तय नहीं होने के कारण चुनाव की समयसीमा को लेकर सवाल अभी भी बने हुए हैं. 

हाल के दिनों में भी छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर परिसर में प्रदर्शन हुए. इन प्रदर्शनों के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन का ताजा आदेश सामने आया है. प्रशासन के मुताबिक, चुनाव की समयसीमा छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने से जुड़ी होगी. यानी चुनाव कराने के लिए संविधान को मंजूरी मिलना अहम कदम है.

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