संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के खिलाफ साजिश कर रहे पाकिस्तान को भारत ने बेनकाब किया है. पाकिस्तान ये साजिश सिंधु जल समझौते पर कर रहा था. पाकिस्तान ने हाल ही में सिंधु जल संधि से जुड़े एक फैसले को गलत तरीके से पेश करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चिट्ठी लिखी थी.
जब भारत को इस हरकत की जानकारी हुई तो विदेश मंत्रालय ने फटकार लगाई. भारत ने कहा कि पाकिस्तान की आदत है कि वह अपने झुठे प्रोपेगैंडा को आगे बढ़ाने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है और झूठ फैलाता है.
भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को ‘abeyance’ में रखने का ऐलान किया था. इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी. भारत ने कहा था कि पाकिस्तान जब तक सीमा पार आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय और स्थायी रूप से खत्म नहीं करता, तब तक समझौता स्थगित रहेगा.
UN में क्या कर रहा था पाकिस्तान
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र में भेजी अपनी चिट्ठी में हालिया Court of Arbitration के फैसले को सिंधु जल समझौते की वैधता के तौर पर पेश कर रहा था. हेग स्थित इस मध्यस्थता कोर्ट ने हाल में कहा था कि भारत का 1960 के सिंधु जल समझौते को ‘abeyance’ में रखना संधि या अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत स्वीकार्य नहीं है और समझौता प्रभावी बना हुआ है.
लेकिन भारत ने तत्काल इस कोर्ट के फैसले को खारिज किया था.
भारत का कहना है कि मध्यस्थता निकाय का गठन ही सिंधु जल समझौते के प्रावधानों के अनुरूप नहीं हुआ. भारत ने इस प्रक्रिया में हिस्सा भी नहीं लिया था. इसलिए उसका कहना है कि इस निकाय के फैसले भारत पर बाध्यकारी नहीं हैं. भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उसके जलविद्युत प्रोजेक्ट और उनसे जुड़े संप्रभु फैसले इस तरह के किसी आदेश से प्रभावित नहीं होंगे.
पाकिस्तान इसी फैसले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष को भेज रहा था ताकि फैसले को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त हो सके.
भारत को जब इस चिट्ठी की जानकारी हुई तो विदेश मंत्रालय तुरंत एक्शन में आ गया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है और झूठ फैलाता है. उन्होंने कहा, "पाकिस्तान की आदत है कि वह अपने झूठे प्रोपेगैंडा को आगे बढ़ाने के लिए तथ्यों को गलत तरीके से पेश करता है और झूठ फैलाता है. सबसे पहली बात तो यह है कि जिसे 'फैसला' बताया जा रहा है, वह 'परमानेंट कोर्ट ऑफ़ आर्बिट्रेशन' का फ़ैसला नहीं है, जैसा कि पाकिस्तान के मंत्री दिखाना चाहते हैं. यह गैर-कानूनी तरीके से बनाई गई एक अदालत का फ़ैसला है. हम इसे असलियत को तोड़ने-मरोड़ने की पाकिस्तान की एक और कोशिश के तौर पर देखते हैं."
1960 में हुए सिंधु जल समझौते के तहत सिंधु नदी की छह नदियों के पानी के इस्तेमाल को लेकर भारत और पाकिस्तान के अधिकार तय किए गए थे. समझौते के तहत सिंधु, झेलम और चिनाब पश्चिमी नदियां हैं, जिन पर पाकिस्तान के लिए पानी के इस्तेमाल के व्यापक अधिकार तय किए गए हैं, जबकि रावी, ब्यास और सतलुज पूर्वी नदियां हैं, जिन पर भारत के अधिकार हैं.
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