वन नेशन वन टाइम... आखिर क्यों पड़ी पूरे देश की 'घड़ी मिलाने' की जरूरत, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेश

केंद्र सरकार ने देशभर में एक समान और सटीक Indian Standard Time (IST) लागू करने के लिए Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 को नोटिफाई किया है.

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कॉमन टाइम रेफरेंस लागू होने से बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन की सटीक टाइम-स्टैम्पिंग में मदद मिलेगी. कॉमन टाइम रेफरेंस लागू होने से बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन की सटीक टाइम-स्टैम्पिंग में मदद मिलेगी.

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:23 PM IST

देशभर में समय को लेकर एक समान और सटीक व्यवस्था लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 को नोटिफाई कर दिया है. नए नियमों के तहत इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) देशभर में कानूनी, प्रशासनिक, व्यावसायिक और दूसरे आधिकारिक कामकाज के लिए कॉमन टाइम रेफरेंस होगा. ये नियम ऑफिशियल गजट में पब्लिश होने की तारीख से 180 दिन बाद लागू होंगे.

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केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इसे 'Setting One Standard Time for India' बताते हुए कहा कि डिजिटल पेमेंट से लेकर ट्रेन यात्रा तक भारत को चलाने में सटीक समय की महत्वपूर्ण भूमिका है. उन्होंने कहा कि नए नियम लागू होने के बाद IST पूरे भारत में कॉमन टाइम रेफरेंस बनेगा, जिससे रोजमर्रा के सिस्टम में सटीकता और बेहतर तालमेल आएगा.

उपभोक्ता मामलों के विभाग ने बीते गुरुवार को Legal Metrology (Indian Standard Time) Rules, 2026 को नोटिफाई किया है. नियमों को लागू करने से पहले 180 दिनों का समय इसलिए दिया गया है, ताकि केंद्र और राज्य सरकारों के विभाग, कारोबारी संस्थान, विभिन्न संस्थाएं और दूसरे संगठन अपने मौजूदा सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव कर सकें.

आखिर क्यों पड़ी नए नियमों की जरूरत?

डिजिटल और टेक्नोलॉजी आधारित सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ने के साथ सटीक समय की जरूरत भी काफी बढ़ गई है. बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट, टेलीकम्युनिकेशन, रेलवे, बिजली व्यवस्था, कंप्यूटर नेटवर्क और सरकारी रिकॉर्ड जैसे कई महत्वपूर्ण सिस्टम सटीक समय और टाइम स्टैम्प पर निर्भर करते हैं.

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अलग-अलग टाइम सोर्स इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में समय में मामूली अंतर भी लेन-देन की रिकॉर्डिंग और अलग-अलग सिस्टम के बीच तालमेल को प्रभावित कर सकता है. सरकार का कहना है कि नए नियमों का मकसद देश के महत्वपूर्ण सिस्टम में सटीक और एक समान Indian Standard Time का इस्तेमाल सुनिश्चित करना है.

बैंकिंग से रेलवे तक होगा इस्तेमाल

कॉमन टाइम रेफरेंस लागू होने से बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट ट्रांजैक्शन की सटीक टाइम-स्टैम्पिंग में मदद मिलेगी. इसके अलावा रेलवे, एयरपोर्ट और दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा.

टेलीकम्युनिकेशन और इंटरनेट नेटवर्क के भरोसेमंद संचालन, बिजली व्यवस्था में सटीक टाइम-कीपिंग और सरकारी एवं कानूनी रिकॉर्ड के रखरखाव में भी IST कॉमन रेफरेंस के तौर पर इस्तेमाल होगा. इसके अलावा इमरजेंसी और समय के लिहाज से संवेदनशील दूसरी सेवाओं के बेहतर समन्वय में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी.

भारतीय टाइमिंग सोर्स पर बढ़ेगा जोर

सरकार देशभर में सटीक Indian Standard Time उपलब्ध कराने के लिए भारतीय संस्थानों और लीगल मेट्रोलॉजी लैबोरेटरीज के जरिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित कर रही है.

नए नियमों में भारत के अपने सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम 'NavIC' और दूसरे स्वीकृत भारतीय टाइमिंग सोर्स के इस्तेमाल का भी प्रावधान किया गया है. इनका इस्तेमाल सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से सटीक समय उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा.

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फिलहाल देश के कई सिस्टम समय निर्धारित करने के लिए विदेशी सैटेलाइट आधारित स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं. सरकार का मानना है कि भारत में अपना टाइम डिसेमिनेशन इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होने से महत्वपूर्ण सिस्टम के लिए नए घरेलू विकल्प उपलब्ध होंगे और बाहरी टाइम सोर्स पर निर्भरता कम की जा सकेगी.

क्या है 'One Nation, One Time' पहल?

सरकार इस व्यवस्था को 'One Nation, One Time' पहल के तहत आगे बढ़ा रही है. इसी पहल के हिस्से के रूप में जुलाई 2026 में बेंगलुरु स्थित Regional Reference Standard Laboratory (RRSL) में 'White Rabbit Technology आधारित Indian Standard Time Dissemination Demonstration Network' शुरू किया गया था.

इस सिस्टम के जरिए बैंकिंग, टेलीकम्युनिकेशन, बिजली, ट्रांसपोर्ट और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम पहुंचाने का प्रदर्शन किया गया है. उपभोक्ता मामलों के विभाग ने CSIR-NPL, ISRO, SEBI, NSE, BSNL और अन्य संबंधित संस्थाओं के सहयोग से RRSL बेंगलुरु और NSE चेन्नई के बीच सुरक्षित तरीके से IST उपलब्ध कराने का प्रदर्शन भी किया है.

White Rabbit Technology क्या करेगी?

White Rabbit Technology का इस्तेमाल बेहद सटीक टाइम सिंक्रोनाइजेशन के लिए किया जाता है. सरकार इस टेक्नोलॉजी के जरिए यह प्रदर्शित कर चुकी है कि अलग-अलग महत्वपूर्ण सिस्टम और संस्थानों तक एक समान और सटीक IST पहुंचाया जा सकता है. यह व्यवस्था खासतौर पर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां कुछ समय का अंतर भी रिकॉर्ड और सिस्टम के संचालन को प्रभावित कर सकता है. उदाहरण के तौर पर डिजिटल वित्तीय लेन-देन में किसी ट्रांजैक्शन का सटीक समय दर्ज होना जरूरी होता है. इसी तरह रेलवे, टेलीकॉम, बिजली और डिजिटल नेटवर्क में भी अलग-अलग सिस्टम का समय एक-दूसरे से सिंक्रोनाइज होना महत्वपूर्ण है.

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सरकार के मुताबिक, नई व्यवस्था लागू होने के बाद देश में समय पर निर्भर महत्वपूर्ण सिस्टम और आधिकारिक कामकाज के लिए एक कॉमन Indian Standard Time रेफरेंस उपलब्ध होगा. इससे न केवल अलग-अलग सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलेगी, बल्कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विदेशी टाइमिंग सोर्स पर भारत की निर्भरता भी कम की जा सकेगी.

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