भारतीय सेना की 2 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) के जर्मन शेफर्ड असॉल्ट डॉग 'टायसन' को जम्मू-कश्मीर में सैन्य अभियान के दौरान असाधारण साहस दिखाने के लिए इस वर्ष मेंशन-इन-डिस्पैचेस सम्मान के लिए चुना गया है. टायसन को ऑपरेशन रक्षक के तहत की गई कार्रवाई के लिए ये सैन्य सम्मान प्रदान किया गया है.
व्हाइट नाइट कोर के अनुसार, टायसन ने आतंकियों के ठिकाने में आगे बढ़ते हुए पहली गोली खुद खाई और घायल होने के बावजूद हमला जारी रखा. टायसन की इस वीरता के दम पर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने 3 पाकिस्तानी आतंकियों को मार गिराया था.
गोली खाकर आतंकियों को किया बेनकाब
व्हाइट नाइट्स कॉर्प्स ने फरवरी में एक्स पर एक पोस्ट में कहा था कि ऑपरेशन त्राशी-I के तहत, टायसन ने 'आतंकवादियों के ठिकाने में घुसते समय सबसे पहले गोली खाकर असाधारण साहस का परिचय दिया.'
पोस्ट में कहा गया, 'अपनी चोटों की परवाह किए बिना, वह आगे बढ़ा और जबरदस्त हमला किया, जिससे आतंकवादी गोलीबारी करने पर मजबूर हो गए और उनकी मौजूदगी का पता चल गया. उसकी निडर कार्रवाई से व्हाइट नाइट कॉर्प्स, J&K पुलिस और CRPF के जवानों को पाकिस्तान-समर्थित तीन आतंकवादियों को सटीक रूप से निशाना बनाने और मार गिराने में मदद मिली.'
कॉर्प्स ने कहा कि टायसन ने कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा का उदाहरण पेश किया. वह हर मायने में एक सच्चा योद्धा और सैनिक था.
आपको बता दें कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों को मंजूरी दी, जिनमें 13 मरणोपरांत पुरस्कार शामिल हैं.
80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व शाम को राष्ट्रपति ने रक्षा बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों और 89 मेंशन-इन-डिस्पैचेस को मंजूरी दी. इनमें सेना के 75, नौसेना के चार और वायुसेना के 10 कर्मी शामिल हैं. थल सेना के 75 मेंशन-इन-डिस्पैचेस की सूची में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड, मेघदूत, हिफाजत और रक्षक में शामिल जवानों के साथ 2 पैरा के केनाइन वॉरियर टायसन का नाम भी शामिल है.
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