गोवा में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के दौरान 97 ऐसे वोटरों के नाम फाइनल वोटर लिस्ट में शामिल नहीं हो सके, जिन्हें जांच के बाद चुनाव अधिकारियों ने योग्य माना था. इन वोटरों को पहले ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के आधार पर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया में रखा गया था. इसके बाद उन्होंने दस्तावेज और आपत्तियां जमा कीं. ERO और AERO ने इन मामलों की जांच की और 97 मामलों में पुराने फैसले को पलटकर वोटरों को फाइनल लिस्ट में शामिल करने की जरूरत मानी.
मामला तब अटक गया, जब पुराने फैसले की एंट्री ECINet में पहले ही हो चुकी थी. रिपोर्ट के मुताबिक ERO और AERO के पास उस फैसले को वापस लेने यानी ‘रोलबैक’ करने का विकल्प नहीं था. गोवा इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने भी बताया था कि रोलबैक और दस्तावेज दोबारा अपलोड करने की सुविधा सिस्टम में उपलब्ध नहीं कराई गई थी.
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7 दिन में 8 ईमेल, फिर भी नहीं हुआ समाधान
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के दफ्तर ने 13 से 18 फरवरी के बीच दिल्ली में चुनाव आयोग को लगातार ईमेल भेजे. 13 फरवरी को 97 मामलों में रोलबैक की जरूरत बताई गई. 14 फरवरी को दो ईमेल भेजकर रोलबैक और दस्तावेज दोबारा अपलोड करने की सुविधा जल्द देने की मांग की गई. उसी दिन मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय गोयल ने भी लिखा कि पहले भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला है.
15 फरवरी को कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का समय पर पालन कराने के लिए रोलबैक विकल्प बेहद जरूरी है. 16 फरवरी को भी जवाब नहीं मिलने की बात कही गई. 17 फरवरी को 97 मामलों की सूची भेजकर इन्हें फाइनल SIR वोटर लिस्ट में शामिल करने के लिए कार्रवाई की मांग की गई.
18 फरवरी को डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संजय कुमार ने चुनाव आयोग की आईटी प्रमुख को लिखा कि ERO और AERO के पास सुधारात्मक कार्रवाई की शक्ति है और IT सिस्टम को ऐसी कार्रवाई में रुकावट नहीं बनना चाहिए. इसके बावजूद 21 फरवरी को फाइनल लिस्ट जारी हुई और ये 97 नाम उसमें नहीं थे.
गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा?
गोवा में 97 मतदाताओं के नाम फाइनल वोटर लिस्ट से बाहर रहने के मामले में गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजय गोयल से जब इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उनसे पूछा गया कि क्या इन नामों को वोटर लिस्ट में दोबारा शामिल करने और पोर्टल पर अपडेट करने को लेकर केंद्र से कोई जवाब मिला है, लेकिन उन्होंने इस पर भी कुछ नहीं कहा. संजय गोयल ने कहा कि यह घटना करीब आठ महीने पुरानी है और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है. हालांकि, बार-बार सवाल पूछे जाने पर उन्होंने अपने सुरक्षाकर्मियों को बुलाकर वहां से जाने को कहा. उन्होंने कहा कि वह पहले अपने रिकॉर्ड की जांच करेंगे और उसके बाद इस मामले पर जवाब देंगे.
65 वोटर तालेगांव से
रिपोर्ट के मुताबिक इन 97 वोटरों में 65 तालेगांव के थे. बाकी वोटर सेंट क्रूज, कुम्बारजुआ, प्रियोल, मडगांव, बेनाउलिम और वेलिम विधानसभा क्षेत्रों से थे. यह मामला चुनावी रोल तैयार करने में स्थानीय अधिकारियों और केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर के बीच अधिकारों को लेकर सवाल खड़े करता है.
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वोटर लिस्ट से नाम कटने का असर सिर्फ वोट तक नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का असर कुछ सरकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है. गोवा की मेडिक्लेम योजना में डायलिसिस, एंजियोप्लास्टी, ओपन-हार्ट सर्जरी, ट्रांसप्लांट, कीमोथेरेपी और कॉक्लियर इंप्लांट जैसे इलाज शामिल हैं और योजना के लिए राज्य के पात्र वोटर होना जरूरी बताया गया है. फाइनल लिस्ट में नाम नहीं आने के बाद कुछ प्रभावित लोगों को नए वोटर के तौर पर फॉर्म 6 के जरिए दोबारा आवेदन करने को भी कहा गया.
साहिल जोशी