फॉर्म 6 के साथ अब नहीं देना होगा Annexure-D, विवाद के बाद चुनाव आयोग का फैसला

SIR को लेकर जारी विवाद के बीच चुनाव आयोग ने फॉर्म-6 को लेकर बड़ा बदलाव किया है. अब उन राज्यों में नए वोटर बनने के लिए फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र यानी Annexure-D देना जरूरी नहीं होगा, जहां SIR पूरा हो चुका है. आयोग ने ऑनलाइन फॉर्म-6 से इसे हटा दिया है. इससे पहली बार वोट बनवाने वाले युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद है.

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Annexure-D अब केवल उन्हीं राज्यों तक सीमित होगा जहां अभी भी SIR चल रहा है (फोटो- PTI) Annexure-D अब केवल उन्हीं राज्यों तक सीमित होगा जहां अभी भी SIR चल रहा है (फोटो- PTI)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 30 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:28 AM IST

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया पर विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला किया है. अब फॉर्म-6 के साथ अतिरिक्त घोषणा पत्र या Annexure-D जरूरी नहीं होगा.

निर्वाचन आयोग पहले ही साफ कर चुका था कि उन्होंने वैधानिक फॉर्म 6 के मूल प्रारूप में कोई कानूनी बदलाव नहीं किया था. हालांकि, विवाद तब शुरू हुआ था जब आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा पत्र (Annexure-D) अनिवार्य रूप से जोड़ दिया.

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अब बुधवार को चुनाव आयोग ने उन राज्यों में ऑनलाइन फॉर्म 6 से इस अतिरिक्त घोषणा पत्र को हटाकर पुराना स्वरूप बहाल कर दिया है, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है.

'पुराने फॉर्म 6' यानी बिना अतिरिक्त घोषणा पत्र के फॉर्म 6 ऑनलाइन या ऑफलाइन भरे जाएंगे. पुराने यानी मूल फॉर्म 6 और SIR वाले फॉर्म 6 यानी घोषणा पत्र में कई अंतर हैं.

पुराना फॉर्म 6 जो अब गैर-SIR राज्यों में लागू हो गया है उसमें कोई अतिरिक्त घोषणा पत्र नहीं होगा. क्योंकि SIR में हरेक मतदाता के माता-पिता, दादा-दादी या वरिष्ठ रिश्तेदार के साथ रिलेशन की पुष्टि हो चुकी है. अब फॉर्म 6 भरने वाले नए मतदाता के माता-पिता या अभिभावक का आंकड़ा डिजिटली दर्ज है.

SIR की शुरुआती व्यवस्था के तौर पर जारी फॉर्म 6 में माता-पिता/दादा-दादी की डिटेल्स देना जरूरी था. लेकिन मूल फॉर्म में इसमें नए आवेदकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने चुनावी रिकॉर्ड से जुड़े रिकॉर्ड देने की जरूरत नहीं होती.

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SIR के दौरान फॉर्म 6 भरने ओर आवेदकों को यह घोषणा करनी पड़ती थी कि वर्ष 2000 के शुरुआती दौर में हुए पिछले SIR के दौरान उनके, उनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम मतदाता सूची में दर्ज थे या नहीं.

चुनाव क्षेत्र और बूथ संख्या भी अनिवार्य कॉलम था. इसमें पूर्व विधानसभा क्षेत्र का नंबर, मतदान केंद्र (बूथ) संख्या या पुराना क्रम संख्या देना अनिवार्य नहीं है. ऑनलाइन फॉर्म भरते वक्त आवेदक को पिछली SIR सूची के मुताबिक अपने परिवार का विधानसभा क्षेत्र नंबर, पोलिंग बूथ नंबर और सीरियल नंबर देना पड़ रहा था.

ऑनलाइन सबमिशन (ECINET पोर्टल) आवेदक सामान्य व्यक्तिगत जानकारी और आयु/निवास प्रमाण पत्र अपलोड करके फॉर्म सीधे सबमिट कर सकते हैं. हालांकि यह तकनीकी रूप से स्वैच्छिक कहा गया था, लेकिन ECINET पोर्टल पर इसे भरे बिना फॉर्म आगे सबमिट नहीं हो पा रहा था.

वोटर पात्रता पर प्रभाव पहली बार वोट बनने वाले (18 वर्ष के युवा) बिना किसी पुरानी पारिवारिक मैपिंग के आसानी से पंजीकरण करा सकते हैं. युवा मतदाताओं (जो 2000 के दशक के बाद पैदा हुए) को दस्तावेजीकरण में भारी समस्या हो रही थी, और जिन वोटरों के नाम पहले कट चुके थे, उन्हें फिर से शामिल होने में कानूनी पेचीदगियों का सामना करना पड़ रहा था.

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यह बदलाव और विवाद क्या था?

चुनाव आयोग (ECI) के मुताबिक, घुसपैठ को रोकने और मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए SIR प्रक्रिया के तहत यह अतिरिक्त घोषणा पत्र जोड़ा गया था. हालांकि, आयोग के भीतर ही दो चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी) ने इस पर यह कहते हुए आपत्ति जताई थी कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत वैधानिक फॉर्म 6 में बदलाव करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार (संसद की मंजूरी से) के पास है, चुनाव आयोग इसे मनमाने ढंग से ऑनलाइन पोर्टल पर अनिवार्य नहीं बना सकता.

इस आंतरिक मतभेद और विवाद के बाद, निर्वाचन आयोग ने सहमति जताते हुए इसे गैर-SIR राज्यों में हटा दिया है और केवल उन्हीं राज्यों तक सीमित रखा है जहां अभी भी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है.

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