एफसीआरए में प्रस्तावित बदलावों को लेकर अमेरिकी सांसद राइली मूर ने सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि भारत की संसद जिन संशोधनों पर विचार कर रही है, उनसे चर्च और धार्मिक चैरिटी पर सरकारी कब्जे का रास्ता खुल सकता है. मूर ने इसे ईसाइयों पर साफ हमला बताया और कहा कि अगर यह विधेयक इसी रूप में आगे बढ़ा तो यह भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों में बड़ी चिंता का मुद्दा बन सकता है. अब उनके इस बयान पर विश्व हिंदू परिषद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है.
वीएचपी के विनोद बंसल ने एक्स पर मूर से पूछा कि एफसीआरए नियमों की किस धारा में चर्च और धार्मिक चैरिटी पर सरकारी कब्जे की बात है. बंसल ने यह भी पूछा कि किस आधार पर इसे ईसाइयों पर हमला और भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों में बड़ी चिंता बताया जा रहा है.
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क्या बोले अमेरिकी सांसद राइली मूर?
राइली मूर ने अपनी पोस्ट में कहा कि सेंट थॉमस द अपोस्टल प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ ही दशक बाद मालाबार तट पहुंचे थे और तब से ईसाई भारत में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन से विदेशी फंड पाने वाले चर्च, धार्मिक चैरिटी, स्कूल और हेल्थकेयर संस्थानों पर सरकार की पकड़ बढ़ सकती है, खासकर तब जब उनका एफसीआरए लाइसेंस रद्द हो जाए, सरेंडर कर दिया जाए या उसका नवीनीकरण न हो.
पृष्ठभूमि में दी गई जानकारी के मुताबिक, प्रस्ताव में ऐसी संस्थाओं की संपत्तियों और फंड के प्रबंधन के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने की बात है. इसी के साथ एफसीआरए लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए पिछली दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपये विदेशी फंड के उपयोग की शर्त भी रखी गई है. मूर ने भारतीय कानून निर्माताओं से इस पर फिर से विचार करने की अपील की.
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विश्व हिंदू परिषद ने कैसे दिया जवाब
विनोद बंसल ने अपने जवाब में कहा कि यह व्यवस्था उन लोगों पर जरूर रोक लगाएगी जो चैरिटी के नाम पर विदेशी फंड लेते हैं, लेकिन उसका इस्तेमाल अवैध धार्मिक मतांतरण, भारत विरोधी, डीप स्टेट और राजनीतिक गतिविधियों के लिए करते हैं और देश को अस्थिर करने की कोशिश करते हैं. उन्होंने लिखा कि आपकी चिंता समझी जा सकती है, लेकिन अफवाह फैलाना बंद कीजिए.
बंसल ने विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से भी ऐसे झूठ बोलने वालों और फर्जी प्रचार करने वालों पर नजर रखने की अपील की. फिलहाल, एफसीआरए में प्रस्तावित बदलावों पर अमेरिकी सांसद राइली मूर ने चर्च और धार्मिक संस्थाओं पर असर को लेकर चिंता जताई है, जबकि विहिप ने उनके दावों को अफवाह और फर्जी प्रचार बताया है.
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