‘वंदे मातरम’ के सिर्फ 2 पद गाएंगे,' कांग्रेस के फैसले के साथ डीके शिवकुमार

डीके शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब नए ‘वंदे मातरम' को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच गीत के सभी पद गाने को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है.

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कांग्रेस के फैसले के साथ डीके शिवकुमार (Photo-ITG) कांग्रेस के फैसले के साथ डीके शिवकुमार (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने पार्टी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो पद गाने के कांग्रेस के फैसले का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे पर पार्टी के रुख के साथ खड़े हैं. शिवकुमार का यह बयान ऐसे समय आया है, जब ‘वंदे मातरम’ के पूरे गीत को लेकर राजनीतिक बहस तेज है. 

कर्नाटक में 'इंडिया टुडे राउंडटेबल' में उन्होंने कहा, "मुझे अपनी पार्टी की विचारधारा पर भरोसा है, हमने जो भी फ़ैसला किया है, मैं उस पर कायम हूं, हो सकता है कि मेरी जानकारी के बिना कहीं-कहीं ऐसा हुआ हो, लेकिन भविष्य में और सरकार के किसी भी कार्यक्रम में हम उसी बात पर कायम रहेंगे जो हमने पहले तय की थी  यानी वे दो पद."

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शिवकुमार ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) ने पिछले हफ़्ते 1937 के अपने उस प्रस्ताव को फिर से दोहराया, जिसके मुताबिक सार्वजनिक और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ शुरुआती दो पद ही गाए जाने चाहिए. यह फैसला तब लिया गया जब नए 'वंदे मातरम बिल' में राष्ट्रीय गीत के सभी पद गाना ज़रूरी कर दिया गया था, और इसे गाने के तरीके को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक विवाद चल रहा था.

तमिलनाडु के साथ पानी के मुद्दे पर बातचीत पर जोर

कावेरी जल बंटवारे के संदर्भ में शिवकुमार ने कहा कि कर्नाटक अपनी जिम्मेदारी को समझता है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 177.2 टीएमसी पानी देने की प्रतिबद्धता रखता है, उन्होंने कहा कि कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच पानी को लेकर विवाद के बावजूद बातचीत का रास्ता बंद नहीं होना चाहिए. उनके मुताबिक, दोनों राज्यों को अपने-अपने हितों को देखते हुए ऐसा समाधान तलाशना चाहिए जिससे पानी की बर्बादी कम हो.

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राज्य के अंदर भी पानी की बर्बादी रोकने की कोशिश

शिवकुमार ने कहा कि कावेरी विवाद के अलावा कर्नाटक के अंदर भी पानी के प्रबंधन को लेकर समस्याएं हैं. उनके मुताबिक, राज्य में करीब 23-30 टीएमसी पानी बर्बाद हो रहा था. इसलिए सरकार ने आपसी टकराव के बजाय मिलकर समाधान निकालने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर एक कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो लंबे समय से काम कर रही है। उनका कहना है कि शुरुआत में जहां दोनों पक्षों के बीच मतभेद थे, वहीं अब बातचीत के जरिए समाधान की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है.

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