2027 की डिजिटल जनगणना: क्या TV-AC की जानकारी से छिनेगा BPL दर्जा?

2027 की जनगणना भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी. इसमें जुटाए गए आंकड़ों का इस्तेमाल केवल विकास योजनाएं बनाने के लिए किया जाएगा, न कि सरकारी योजनाओं की पात्रता, मतदान के अधिकार या नागरिकता तय करने के लिए.

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जनगणना को लेकर लोगों के मन में उठ रहे तमाम सवालों को जवाब दिया गया ( File Photo: PTI) जनगणना को लेकर लोगों के मन में उठ रहे तमाम सवालों को जवाब दिया गया ( File Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:59 PM IST

देश में होने वाली 2027 की जनगणना कई मायनों में खास होगी. यह पूरी तरह से डिजिटल होगी. जिसमें लोग चाहें तो अपनी जानकारी खुद भी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे. तमिलनाडु के जनगणना निदेशक एम. सुंदरश बाबू ने बुधवार को बताया कि जनगणना के दौरान जुटाई गई जानकारी का इस्तेमाल केवल विकास योजनाएं बनाने के लिए किया जाएगा. इसका उपयोग किसी की सरकारी योजनाओं की पात्रता, मतदान के अधिकार या नागरिकता तय करने में नहीं होगा.

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कंसल्टेशन बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुंदरश बाबू ने बताया कि जनगणना दो स्टेप में पूरी की जाएगी. पहले चरण में मकानों की सूची और आवास से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी, जबकि दूसरे स्टेप में आबादी की गणना होगी. तमिलनाडु में पहले चरण का फील्ड सर्वे 1 अगस्त से 30 अगस्त तक चलेगा. उन्होंने बताया कि इस बार लोगों को अपनी जानकारी खुद ऑनलाइन दर्ज करने के लिए सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल की सुविधा भी दी गई है. इसके लिए 31 जुलाई तक का समय रखा गया है. मदुरै जिले में अब तक करीब 9,000 परिवार इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं.

अगस्त में होने वाले सर्वे के दौरान घर-घर जाकर पूरे देश के लिए तय 33 सवालों के जवाब दर्ज किया जाएगा. एक गणनाकर्मी करीब 200 से 250 घरों यानी लगभग 800 से 900 लोगों का डेटा जुटाएगा. तमिलनाडु में इस काम के लिए करीब 1.6 लाख लोगों की तैनाती होगी, जबकि देशभर में लगभग 30 लाख अधिकारी- कर्मचारी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे.

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सरकारी योजनाओ को लेकर सफाई

एम. सुंदरश बाबू ने लोगों की आशंकाओं को दूर करते हुए कहा कि घर में एयर कंडीशनर, टीवी या मोबाइल जैसी सुविधाओं से जुड़ी जानकारी का इस्तेमाल किसी का बीपीएल दर्जा खत्म करने या सरकारी योजनाओं का लाभ रोकने के लिए नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जनगणना से जुटाया गया डेटा केवल विकास योजनाओं की तैयारी के लिए होगा. किसी व्यक्ति की जानकारी पब्लिक नहीं की जाएगी और न ही इसका इस्तेमाल सरकारी लाभ, मतदान के अधिकार या नागरिकता तय करने के लिए किया जाएगा.

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