करीब तीन हफ्तों से देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था एक ही सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही थी- क्या धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे? जंतर-मंतर से लेकर सोशल मीडिया तक, यही मांग सबसे ज्यादा गूंज रही थी. अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेज दिया है.
यानी जिस मांग को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन की 'रेड लाइन' बता रही थी, वह पूरी हो गई है. लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इसके साथ आंदोलन भी खत्म हो जाएगा?
NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आईं तो देशभर में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. सरकार ने सीबीआई जांच बिठाई, परीक्षा रद्द की और दोबारा एग्जाम कराने का फैसला लिया. अगले साल से परीक्षा को पूरी तरह CBT (Computer Based Test) मोड में कराने का भी ऐलान किया गया.
लेकिन सड़क पर उतरे छात्रों का कहना था कि सिर्फ जांच और दोबारा परीक्षा काफी नहीं है. जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए. यहीं से आंदोलन में CJP की एंट्री हुई और धीरे-धीरे उसकी सबसे बड़ी मांग बन गई- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा... बीते दिनों सरकार और CJP के बीच कई दौर की बातचीत हुई. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने भी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की.
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CJP का दावा था कि सरकार उनकी कुछ मांगों पर पॉजिटिव है. कथित तौर पर पीड़ित परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को लेकर बातचीत आगे बढ़ी. लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला. यही वजह थी कि CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके बार-बार कह रहे थे कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे, आंदोलन जारी रहेगा.
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो आंदोलन देशभर में और तेज किया जाएगा, यहां तक कि प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई जाएगी. आज शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफे का लेटर शेयर किया. उन्होंने लिखा कि छात्रों का भविष्य किसी भी विवाद से ऊपर है.
उन्होंने अपने लेटर में कहा कि जैसे ही NEET-UG में गड़बड़ियों की शिकायतें मिलीं, सरकार ने सीबीआई जांच कराई, परीक्षा दोबारा कराई और परीक्षा सिस्टम में सुधार की दिशा में फैसले लिए. उन्होंने यह भी कहा कि 20 लाख से ज्यादा छात्रों की निष्पक्ष परीक्षा कराना उनकी प्राथमिकता थी. लेकिन आखिर में उन्होंने लिखा कि शिक्षा व्यवस्था पर जनता का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने पद छोड़ने का फैसला किया.
अब गेंद CJP के पाले में
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उस मांग को पूरा कर रहा है, जिसे CJP लगातार अपनी सबसे अहम शर्त बता रही थी. यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि CJP की मांगों की सूची सिर्फ इस्तीफे तक सीमित नहीं थी. संगठन परीक्षा सिस्टम में बड़े सुधार, पेपर लीक के दोषियों पर सख्त एक्शन, पीड़ित परिवारों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने जैसी मांगें भी उठा रहा था.
यानी आंदोलन की सबसे बड़ी मांग पूरी हो गई है, लेकिन यह देखना बाकी है कि CJP इसे अपनी जीत घोषित कर धरना खत्म करती है या बाकी मुद्दों पर भी सरकार से लिखित आश्वासन मिलने तक संघर्ष जारी रखती है. फिलहाल इतना तय है कि जिस मांग पर सरकार और आंदोलन के बीच सबसे लंबी रस्साकशी चल रही थी, वह गांठ अब खुल गई है. अब अगला कदम आंदोलनकारियों का होगा.
6 जून से शुरू हुआ था आंदोलन
CJP ने लंबे समय से NEET पेपर लीक, परीक्षा सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर आंदोलन किया. संगठन की तीन मुख्य मांगें थीं कि पीड़ित छात्रों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा मिले. प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIRs वापस हों और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा... सरकार के साथ हुई कई दौर की बातचीत में पहले दो मांगों पर पॉजिटिव रुख दिखा था, लेकिन तीसरी मांग मंत्री के इस्तीफा पर अटकाव बना हुआ था.
दरअसल, CJP ने 6 जून से आंदोलन शुरू किया था, जो बाद में देश के कई शहरों तक फैला. क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 26 दिन की भूख हड़ताल की. सरकार ने सुधार, मुआवजे और संसद में चर्चा का आश्वासन दिया था. 20 जुलाई को पुलिस से झड़प हुई, जिसमें कई छात्र घायल हुए थे. विपक्षी नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव समेत कई नेता जंतर-मंतर पहुंचे और समर्थन जताया. अब प्रधान के इस्तीफे के बाद संगठन के अगले रोडमैप पर फैसला होना बाकी है.
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