दिल्ली-यूपी को केंद्र की बड़ी सौगात! ₹14,115 करोड़ के रोड प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

नरेंद्र मोदी कैबिनेट ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 14,115 करोड़ रुपये की दो सड़क परियोजनाओं को मंजूरी देकर कनेक्टिविटी मजबूत करने का फैसला किया है.

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दिल्ली और यूपी की कनेक्टिविटी होगी बेहतर (Representative Image/File) दिल्ली और यूपी की कनेक्टिविटी होगी बेहतर (Representative Image/File)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 4:11 PM IST

केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को नई दिल्ली और उत्तर प्रदेश में 14,115 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी है. सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक ब्रीफिंग में बताया कि NH-148AE के लिए 6-लेन वाली सड़क सुरंग के निर्माण को मंजूरी दी गई है. 

यह सुरंग दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज के नेल्सन मंडेला मार्ग से जोड़ेगी.

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8.1 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को कुल 6,969.67 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा.

कानपुर-काबरई सेक्शन को मंजूरी

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में कानपुर-कब्रई कॉरिडोर को चार/छह लेन का बनाने के लिए ₹7,145 करोड़ के अनुमानित निवेश को मंजूरी दी. 242 किलोमीटर लंबा यह एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे, भोपाल-कानपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर का हिस्सा है और इसे 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (टोल)' मॉडल के तहत बनाया जाएगा. इसका निर्माण कार्य ढाई साल के अंदर पूरा करने का टारगेट रखा गया है.

यह हाईवे कानपुर, हमीरपुर और महोबा जिलों से होकर गुजरेगा, जिसमें महोबा को 'एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट' (आकांक्षी जिला) के तौर पर चुना गया है. इस प्रोजेक्ट से बुंदेलखंड क्षेत्र में कनेक्टिविटी बेहतर होने, माल और यात्रियों की आवाजाही तेज होने, लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और औद्योगिक व आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

यह भी पढ़ें: 648 करोड़ की रायबरेली-जौनपुर सड़क परियोजना मंजूर

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सरकार के मुताबिक, बेहतर सड़क नेटवर्क से बाजारों तक पहुंच आसान होगी, निर्माण के दौरान रोजगार के अवसर पैदा होंगे और क्षेत्रीय परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा.

₹14,115 करोड़ के कुल निवेश वाले ये दोनों प्रोजेक्ट केंद्र सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका मकसद नेशनल हाईवे नेटवर्क का विस्तार करना, 'लास्ट-माइल कनेक्टिविटी' यानी अंतिम छोर तक संपर्क को बेहतर बनाना और ऐसे हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर बनाना है, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा दें और प्रमुख शहरी व औद्योगिक क्षेत्रों के बीच यात्रा के समय को कम करें.

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