राम मंच पर आते हैं. लक्ष्मण उनके साथ हैं. सीता, रावण, हनुमान और जटायु भी अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं. रामायण के प्रसंग शुरू होते हैं और मंच से चौपाइयां गूंजने लगती हैं. ये किरदार निभाने वाले बड़े कलाकार नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे हैं. जगह है पूर्वी दिल्ली का प्रीत विहार... यहां होने वाली रामलीला में पहली कक्षा से लेकर 12वीं तक के स्टूडेंट रामायण के अलग-अलग किरदार निभा रहे हैं.
कोई राम बना है, कोई लक्ष्मण, कोई सीता तो कोई रावण. कुंभकर्ण, मेघनाद, हनुमान, जटायु और ऋषि-मुनियों की भूमिकाएं भी बच्चे ही निभाते हैं. इस रामलीला को खास बनाने के लिए न तो बाहर से कलाकारों की टीम बुलाई जाती है और न ही मेकअप के लिए किसी पेशेवर आर्टिस्ट की जरूरत पड़ती है. मंच पर दिखने वाले किरदारों के पीछे बच्चों की मेहनत और स्कूल के शिक्षकों का गाइडेंस है.
रामलीला में अभिनय करना एक बात है, लेकिन किरदार के संवाद याद करना और उन्हें दर्शकों के सामने पूरे आत्मविश्वास के साथ बोलना अलग चुनौती है. प्रीत विहार की इस रामलीला में बच्चे यह जिम्मेदारी भी खुद निभाते हैं.
मंच पर आने वाले बच्चे रामायण की चौपाइयां और अपने किरदार के संवाद अपनी आवाज में बोलते हैं. इसके लिए वे कानों पर माइक लगाते हैं, ताकि उनकी आवाज दर्शकों तक पहुंच सके. संवाद याद करने से लेकर मंच पर सही समय पर अपनी भूमिका निभाने तक, बच्चों को काफी तैयारी करनी पड़ती है.
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जिस उम्र में बच्चे स्कूल की किताबों और होमवर्क में व्यस्त रहते हैं, उसी उम्र में वे रामायण के इतने सारे किरदारों को समझने, उनके संवाद याद करने और मंच पर उन्हें निभाने की कोशिश कर रहे हैं. रामलीला में राम का किरदार आर्यन निभा रहे हैं. अंकित लक्ष्मण बने हैं, साध्वी सीता की भूमिका में हैं और पवन रावण का किरदार निभा रहे हैं. इन बच्चों के लिए यह सिर्फ एक नाटक में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि दर्शकों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका भी है.
मेकअप भी टीचर करते हैं, तैयारी भी उन्हीं की देखरेख में
यहां बच्चों को तैयार करने के लिए बाहर से मेकअप आर्टिस्ट नहीं बुलाए जाते. स्कूल के टीचर ही बच्चों का मेकअप करते हैं और उनके किरदार के मुताबिक उन्हें तैयार करते हैं. बच्चों को उनके रोल के हिसाब से तैयार करने से लेकर मंच पर अभिनय के लिए मार्गदर्शन देने तक, टीचर इसमें अहम भूमिका निभाते हैं. यानी मंच पर भले ही रामायण के पात्र नजर आते हों, लेकिन पर्दे के पीछे बच्चों और टीचर्स की मेहनत काम करती है.
बच्चों को अभिनय के साथ अनुशासन, संवाद बोलने और दर्शकों के सामने अपनी प्रस्तुति देने का अनुभव भी मिलता है. अलग-अलग कक्षाओं में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का एक साथ इस तरह की एक्टिविटी में हिस्सा लेना आयोजन का अहम हिस्सा है.
भरत मिलाप से सीता हरण तक, मंच पर उतरे रामायण के प्रसंग
रामलीला में सिर्फ किरदारों का परिचय नहीं कराया जाता, बल्कि रामायण की कई अहम घटनाओं का मंचन भी होता है. भरत मिलाप, शूर्पणखा की नाक काटने, सीता हरण और जटायु वध जैसे प्रसंगों को बच्चों ने मंच पर पेश किया. इन प्रसंगों में राम, लक्ष्मण, सीता और रावण जैसे किरदार कहानी को आगे बढ़ाते हैं. बच्चों के अभिनय और संवादों के जरिए दर्शक रामायण की उन घटनाओं को मंच पर देखते हैं, जिनसे भारतीय समाज लंबे समय से परिचित रहा है.
छोटे बच्चों को इन भूमिकाओं में देखना दर्शकों के लिए आकर्षण बना हुआ है. हर किरदार के लिए बच्चों को अपनी भूमिका समझनी पड़ती है और उसके हिसाब से अभिनय करना होता है. इस रामलीला की पहचान केवल बच्चों के मंच पर आने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी तैयारी और सामूहिक प्रयास भी इसे खास बनाते हैं.
कई साल से हो रहा है आयोजन
प्रीत विहार में यह रामलीला पिछले कई साल से हो रही है. इसका मकसद बच्चों को रामायण के प्रसंगों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना भी है. स्कूल में पढ़ाई के अलावा बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच मिले, यह भी ऐसे आयोजनों का एक पहलू है. यहां स्टूडेंट्स किताबों से बाहर निकलकर एक ऐसी प्रस्तुति का हिस्सा बनते हैं, जिसमें उन्हें संवाद याद रखने, दूसरे कलाकारों के साथ तालमेल बैठाने और दर्शकों के सामने अभिनय करने की जरूरत होती है.
रामलीला के अध्यक्ष योगेश अरोड़ा और स्कूल संचालक छवि नारायण अरोड़ा भी इस आयोजन से जुड़े हैं. टीचर्स के गाइडेंस में तैयार होने वाले बच्चे इस मंच के जरिए अपनी कला दिखा रहे हैं.
रामलीला की परंपरा लंबे समय से लोगों को रामायण के प्रसंगों से जोड़ती रही है. प्रीत विहार में इस परंपरा को आगे बढ़ाने का तरीका थोड़ा अलग है. यहां मंच पर बड़े कलाकारों की जगह स्कूली बच्चे हैं. बाहर से कलाकारों और मेकअप आर्टिस्ट की टीम बुलाने के बजाय स्कूल के टीचर और स्टूडेंट्स मिलकर तैयार करते हैं.
राम बने आर्यन, लक्ष्मण बने अंकित, सीता बनीं साध्वी और रावण बने पवन जैसे बच्चों के लिए यह अनुभव पढ़ाई से अलग अपना टैलेंट दिखाने का मौका है. वहीं, दर्शकों को रामायण के परिचित किरदार बच्चों के अभिनय में देखने को मिलते हैं.
रोहतास यादव